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सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट रद्द कर पुन: जांच के आदेश

एक छात्रा को अगवाकर दुष्कर्म करने के आरोप में सीबीआई की जांच रिपोर्ट को अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट अधूरी है। विवेचना में कई तथ्य सही नहीं है। अदालत ने सीबीआई के विवेचक को पुन: विवेचना कर रिपोर्ट अदालत में पेश करने के आदेश दिए।

मामला मेरठ जिले के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाली बीए की छात्रा ने थाने में मार्च 2015 में मुकदमा दर्ज कराया था। छात्रा ने रिपोर्ट में माता-पिता, चाचा-चाची, बुआ समेत 26 लोगों को नामजद कराया था। छात्रा का आरोप था कि इन सभी आरोपियों ने मिलकर उसे घर में बंधक बनाकर रखा। विरोध करने पर उसके साथ छेड़खानी, मारपीट और दुष्कर्म की घटना की गई। परिवार और कुछ बाहरी लोगों की इन हरकतों से परेशान छात्रा ने पुलिस का सहारा लिया। युवती ने मेरठ में तैनात एक पुलिस अधिकारी पर भी उक्त अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया था। हालांकि विवेचना में उनका नाम नहीं है।

वर्ष 2014-15 की इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस से जांच में सहयोग नहीं मिलने पर युवती ने उच्चतम न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर सीबीआई जांच की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर 17 फरवरी 2015 से सीबीआई जांच शुरू की गई। तीन सितंबर 2016 को सीबाआई ने क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।

सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना सिंह की अदालत में मंगलवार को इस मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में वादिनी की मेडिकल रिपोर्ट समेत कई अन्य खामियां पाईं। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने युवती के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को निरस्त करने के आदेश दिए। अदालत ने विवेचक से पुन: जांच कर रिपोर्ट अदालत में सौंपने के आदेश दिए।

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  • Web Title:CBI closes report closure report