
गाजियाबाद में 9वीं मंजिल से कूदने वाली बच्चियों के पिता और 3 मां से पूछताछ, सवाल-जवाब देखिए
गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन बहनों के आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने पहली बार पिता और तीनों मां से एक घंटे तक पूछताछ और पांच घंटे तक फ्लैट में खोजबीन की। मां-बाप से कई अहम सवाल पूछे गए।
गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन बहनों के आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने पहली बार पिता और तीनों मां से एक घंटे तक पूछताछ और पांच घंटे तक फ्लैट में खोजबीन की। इसके बावजूद खुदकुशी समेत अन्य सवाल अब भी उलझे हैं। वहीं, पुलिस के मुताबिक चेतन और उनकी तीनों पत्नियों से पूछताछ में कई बातें विरोधाभासी मिली हैं। सभी बयानों को सत्यापित किया जाएगा। गलत मिले बिंदुओं पर दोबारा पूछताछ की जाएगी।
भारत सिटी के नौवें तल स्थित फ्लैट में रहने वाले चेतन कुमार की बेटी 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी ने चार फरवरी को तड़के खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। पिता ने कोरियन गेम और वीडियो का आदी बताते हुए बेटियों के खुदकुशी करने की बात कही थी। चेतन परिवार के साथ दिल्ली में बच्चियों के अस्थि विसर्जन कर शुक्रवार को फ्लैट में लौटे तो रात करीब नौ बजे पुलिस टीम पहुंची और उन्हें डीसीपी कार्यालय ले गई।
यहां डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने चेतन, उनकी पहली पत्नी सुजाता, दूसरी पत्नी हिना (सुजाता की बहन) और तीसरी पत्नी टीना से एक घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद चारों अपने फ्लैट पर लौट आए और शनिवार को सिर्फ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के आने के समय ही गेट खोला। घटना के बाद से सोसाइटी में रहने वाले लोग काफी डरे हुए हैं। ऐसे में घटना के तीन दिन बाद भी क्राइम सीन पर लगाई गई रस्सी और छोटे बैरियर देखकर दहशत होती है।
क्या थे बड़े सवाल और उनके जवाब
●बच्चियों को स्कूल क्यों नहीं भेजा
चेतन ने कहा, बच्चियों ने कोरोना के समय में स्कूल जाना बंद कर दिया था। इसके बाद कई बार स्कूल भेजने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं गईं। 13 वर्षीय बेटा दिव्यांग है। वहीं, टीना से जन्मी छोटी बेटी अभी चार साल की है।
●बेटियां की निगरानी क्यों नहीं कर पाए
तीनों बेटियां एक साथ खाती, रहतीं और शौचालय जाती थीं। वह हमारे साथ सोती थीं, लेकिन हमें नींद आते ही मोबाइल लेकर तीसरे कमरे में जाकर देखने लगती थीं। इस हद तक आदी होने का पहले पता चल जाता तो कुछ न कुछ जरूर करता।
●बच्चियों से मारपीट और शादी कराने की बात में क्या सच्चाई है
नहीं, कभी भी बच्चियों को नहीं मारा। शादी कराने की बात उन्हें डराने के लिए कही थी, ताकि मोबाइल देखना छोड़ दें।
●बच्चियों को मोबाइल कब दिलाए
करीब छह सात माह पहले दो मोबाइल दिलाए थे। दोनों फोन एक जानकार के कहने पर एक व्यक्ति को बेच दिए।
●दो फ्लैट किराये पर क्यों लिए
घर में ज्यादा सदस्य थे। कभी कोई मेहमान आता या कभी झगड़ा होता था तो उसके लिए दूसरा फ्लैट किराये पर लिया था। कोरोना के दौरान थोड़ा नुकसान हुआ, लेकिन दो करोड़ के कर्ज की बात गलत है।
●बच्चियों को क्या दिक्कत थी
सुजाता ने कहा कि उनकी गलती थी जो बच्चियों पर ध्यान नहीं दिया। इसीलिए अपनी बच्चियों को खो दिया।
मौत के लिए परिवार जिम्मेदार: डॉ. बबीता सिंह चौहान
तीन नाबालिग बहनों के नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने के मामले में शनिवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान परिजनों से मिलीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि बच्चियों की मौत में परिवार की लापरवाही है, जो उन्हें स्कूल तक नहीं भेज सके। उन्होंने पांचवीं तक के छात्रों की पढ़ाई में मोबाइल के प्रयोग पर पाबंदी की बात दोहराते हुए कहा कि इसे सख्ती से लागू कराएंगी। डॉ. बबीता सिंह चौहान शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह के साथ भारत सिटी सोसाइटी पहुंचीं। उन्होंने किशोरियों के पिता चेतन और माता सुजाता व हिना से बातचीत की। करीब 20 मिनट तक उन्होंने बच्चियों के साथ हुए हादसे के बारे में जाना। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद घटना है। डॉ. बबीता ने बच्चियों की मौत को लेकर कहा कि इसके लिए परिवार की लापरवाही ही जिम्मेदार है। एक साथ तीन-तीन बच्ची, वो भी बहनों का ऐसा कदम उठाना बिना लापरवाही के हो ही नहीं सकता। इतना बड़ा घर नहीं है, फिर भी बच्चियों की गतिविधियों पर निगरानी नहीं की।

लेखक के बारे में
Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
सुधीर झा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार और संपादकीय नेतृत्वकर्ता हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में LiveHindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित 8 राज्यों की कवरेज संभालने वाली स्टेट टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वे राजनीति, अपराध और प्रशासन से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज से लेकर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तक, तथ्य-आधारित और संतुलित पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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