लोनी में लगेगा अमेरिका जैसी तकनीक वाला TTP, 300 उद्योगों को मिलेगा पानी, IIT रुड़की से डिजाइन को मंजूरी

Mar 31, 2026 07:08 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद, आयुष गंगवार
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IIT रुड़की ने लोनी में बनने वाले 15 MLD टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट के डिजाइन को मंजूरी दे दी है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसी आधुनिक 'सबमर्ज्ड तकनीक' पर आधारित इस प्लांट से 300+ फैक्ट्रियों को पानी मिलेगा और गिरते भूजल स्तर पर लगाम लगेगी।

लोनी में लगेगा अमेरिका जैसी तकनीक वाला TTP, 300 उद्योगों को मिलेगा पानी, IIT रुड़की से डिजाइन को मंजूरी

गाजियाबाद के लोनी में प्रस्तावित टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) के डिजाइन को आईआईटी रुड़की से मंजूरी मिल गई है। लंबे समय से अटके प्लांट का निर्माण कार्य अब शुरू हो सकेगा। 15 एमएलडी के प्लांट से 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को पेयजल की आपूर्ति की जाएगी।

औद्योगिक इकाइयों में भूजल दोहन रोकने और इकाइयों को नियमित जलापूर्ति देने के लिए जिले में दूसरा टीटीपी अमृत योजना 2.0 के तहत दो साल पहले स्वीकृत हुआ था। जल निगम की इस योजना के तहत 15 एमएलडी का टीटीपी लोनी के 30 एमएलडी के एसटीपी के पास ही बनेगा। 82.7 करोड़ रुपये से बनने वाले प्लांट की टेंडर प्रक्रिया ही करीब छह माह में पूरी हो पाई थी। इसके बाद प्लांट के डिजाइन को लेकर पेंच फंसा रहा।

अमेरिका जैसी तकनीक पर काम होगा

अधिकारियों के मुताबिक, प्लांट को अधिक लागत वाली तकनीक के आधार पर बनाया जा रहा है। इसमें प्लांट के रखरखाव पर कम खर्च आएगा। इसे सबमर्ज्ड तकनीक कहा जाता है। इसके लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश में इस तकनीक पर बने टीटीपी का अध्ययन किया गया और फिर डिजाइन आईआईटी रुड़की को दिया गया। बीते दिनों आईआईटी रुड़की से डिजाइन को मंजूरी मिल गई है। अब प्लांट का काम धरातल पर शुरू होगा।

मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

इस परियोजना के तहत लोनी के एसटीपी के पास बनने वाले टीटीपी से 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। एसटीपी से 20 एमएलडी शोधित पानी निकलता है। इसमें से 15 एमएलडी टीटीपी में शोधित होगा और फिर उद्योगों को आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए 35 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी। इसमें से 15 किलोमीटर लाइन डाली जा चुकी है। मार्च 2025 में योजना का काम शुरू हुआ था। इसे मार्च 2027 में पूरा किया जाना है, मगर प्लांट का काम लेट होने से डेडलाइन बढ़ना तय है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि डेडलाइन बढ़ने पर भी परियोजना की लागत नहीं बढ़ेगी।

भूजल संरक्षण में कारगर

औद्योगिक इकाइयों को शोधित पेयजल की आपूर्ति शुरू होने से क्षेत्र में भूजल दोहन पर प्रभावी रोक लगेगी। फिलहाल, सभी उद्योग भूजल पर निर्भर हैं, जिससे जलस्तर लगातार गिर रहा है। टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट से मिलने वाला पेयजल एक वैकल्पिक और स्थायी स्रोत प्रदान करेगा, जिससे उद्योगों की जरूरतें भी पूरी होंगी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा। इंदिरापुरम में बना 40 एमएलडी का यही प्लांट पहले से उद्योगों को जल की आपूर्ति दे रहा है।

अरुण प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम, ''प्लांट को ऐसी तकनीक पर बनाया जा रहा है, जिससे रखरखाव का खर्च कम से कम हो। इस डिजाइन को आईआईडी की मंजूरी मिल गई है। जल्द प्लांट का काम भी शुरू होगा।''

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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