
गाजियाबाद जिले को एक और राजकीय विद्यालय की सौगात, आठवीं के बाद नहीं बदलना पड़ेगा स्कूल
गाजियाबाद जिले को एक और राजकीय विद्यालय की सौगात मिली है। उच्च प्राथमिक विद्यालय भदौली को हाईस्कूल बनाने का प्रस्ताव पास हो गया है। स्कूल निर्माण के लिए शासन ने एक करोड़ 39 लाख का बजट दिया है। इससे बच्चों को दूर के स्कूलों में पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। जिले में अभी 14 राजकीय विद्यालय हैं।
गाजियाबाद जिले को एक और राजकीय विद्यालय की सौगात मिली है। उच्च प्राथमिक विद्यालय भदौली को हाईस्कूल बनाने का प्रस्ताव पास हो गया है। स्कूल निर्माण के लिए शासन ने एक करोड़ 39 लाख का बजट दिया है।
निर्माण कार्य की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था को सौंप दी गई है। इससे बच्चों को दूर के स्कूलों में पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। जिले में अभी तक कुल 14 राजकीय विद्यालय हैं। मुरादनगर ब्लॉक के भदौली में हाईस्कूल बनने से राजकीय विद्यालयों की संख्या 15 हो जाएगी। स्कूल बनने से आसपास के बच्चों को दूर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि जल्द ही स्कूल के निर्माण का कार्य शुरु करा दिया जाएगा। निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था को दे दी है। उन्होंने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय भदौली को हाईस्कूल बनाने से आठवीं के बाद भी बच्चों नौवीं और दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर सकेंगे।
अभी आसपास हाईस्कूल ने होने से बच्चों को दूर के स्कूलों में जाना पड़ता है या निजी स्कूलों का सहारा लेना पड़ता है। हाईस्कूल बनने से बच्चों को सहूलियत हो जाएगी। साहिबाबाद क्षेत्र में एक भी हाईस्कूल न होने का कारण विधायक सुनील शर्मा ने स्कूल को हाईस्कूल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। स्कूल में कक्षाएं, लाइब्रेरी और लैब का निर्माण कराया गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि हाईस्कूल बनने से आसपास के बच्चों को बहुत लाभ होगा। इससे बच्चों को आठवीं के बाद स्कूल बदलने के जरूरत नहीं पड़ेगी। जल्द से जल्द स्कूल का निर्माण कार्य शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कम समय में ही बच्चों को सुविधा दी जा सके।वर्ष 2024 में राजकीय विद्यालय कड़कड़ मॉडल का प्रस्ताव पास हुआ था। स्कूल का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को हैं। स्कूल में सत्र 2026-27 में बच्चों के नौवीं और दसवीं कक्षा के दाखिले होने की उम्मीद है।
जिले में कुल 14 राजकीय विद्यालय हैं जिसमें सात हाईस्कूल और सात इंटर कॉलेज हैं। हाईस्कूलों में राजकीय हाईस्कूल कुशलिया, राजकीय हाईस्कूल नूरपुर, राजकीय हाईस्कूल मतौर, राजकीय हाईस्कूल नहाली, राजकीय हाईस्कूल अतरौली, राजकीय हाईस्कूल सैदपुर हुसैनपुर डीलना और राजकीय हाईस्कूल कड़कड़ मॉडल शामिल हैं। इसमें कड़कड़ मॉडल विद्यालय का प्रस्ताव दो साल पहले पास हुआ था। अभी इसमें बच्चों की नौवीं और दसवीं की पढ़ाई शुरू नहीं हुई है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




