दिल्ली के कई इलाकों में गैस की दिक्कत, बुक कराने के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लोगों को गैस सिलेंडर की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। नारायणा, बेगमपुर, उत्तर पश्चिमी दिल्ली के कई इलाके और पश्चिमी दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर लोगों को गैस एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, इसके बाद भी उन्हें गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा।

दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लोगों को गैस सिलेंडर की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। नारायणा, बेगमपुर, उत्तर पश्चिमी दिल्ली के कई इलाके और पश्चिमी दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर लोगों को गैस एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, इसके बाद भी उन्हें गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
लोगों की शिकायत है कि ऑनलाइन बुकिंग करने पर भी गैस सिलेंडर की बुकिंग नहीं हो रही है। पहले जो भी बुकिंग गैस सिलेंडर की कराई गई है उसके बाद भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
रोहिणी सेक्टर 20 में भी लोगों को गैस सिलेंडर की बुकिंग में दिक्कत हो रही है। बेगमपुर के निवासी महेश ने बताया कि गैस बुकिंग करने में काफी दिक्कत आ रही है। रोहिणी सेक्टर 20 में स्थित गैस एजेंसी के पास जाकर समस्या बता रहे हैं या ऑनलाइन बुकिंग न होने की बात कर रहे हैं। तब हमें एजेंसी के प्रतिनिधि सर्वर इशू बता रहे हैं, इस वजह से सिलेंडर बुक नहीं हो पा रहा है।
पहले सिलेंडर 21 दिन बाद दूसरा सिलेंडर बुक हो जाता था और इसकी समय सीमा बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। लोगों का आरोप है कि बेगमपुर के आसपास की कॉलोनी में अवैध रूप से सिलेंडर की कालाबाजारी की। जा रही है। इस पर कानून व प्रशासन रोक लगने चाहिए।
नारायणा के निवासियों ने बताया कि शुक्रवार सुबह से ही गैस सिलेंडर की बुकिंग ऑनलाइन करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन यह बुक नहीं हो रही है। इसे लेकर लगातार गैस एजेंसी को फोन कर रहे हैं लेकिन कोई समाधान नहीं मिल पा रहा। इसका असर अब खाना बनाने पर भी पड़ने लगा है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


