
'गुरु' के पास गुर्गे; विदेशों में क्या सिखा रहे गैंगस्टर कि पुलिस खाती है चकमा
देश की जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए संगठित अपराध की दुनिया अब हाईटेक हो गई है। हाल ही में विदेश से डिपोर्ट कर लाए गए गैंगस्टर से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि विदेशों में बैठे गैंगस्टर अपने गुर्गों को साइबर ठगी के लिए प्रशिक्षण दिलवा रहे हैं।
देश की जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए संगठित अपराध की दुनिया अब हाईटेक हो गई है। हाल ही में विदेश से डिपोर्ट कर लाए गए गैंगस्टर से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि विदेशों में बैठे गैंगस्टर अपने गुर्गों को साइबर ठगी के लिए प्रशिक्षण दिलवा रहे हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक गैंगस्टर अब अपने गुर्गों पर पैसे खर्च कर उन्हें विदेश में साइबर प्रशिक्षण दिलवा रहे हैं। इन कोर्स में उन्हें डिजिटल फुटप्रिंट्स को मिटाने, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के जरिए अपनी असली लोकेशन छुपाने, प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करने और डार्क वेब पर सुरक्षित रूप से संवाद स्थापित करने की ट्रेनिंग दी जाती है। यह रणनीति संगठित अपराध के स्वरूप में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है। अब अपराध की योजना और नियंत्रण विदेशी धरती से होता है, जबकि उसे अंजाम देने वाले गुर्गे पूरी तरह से साइबर साक्षर होकर पुलिस के लिए अदृश्य हो जाते हैं।
एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रणनीति इसलिए भी सफल हो रही है, क्योंकि वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस जब भी डिजिटल साक्ष्यों (जैसे कॉल रिकॉर्ड या आईपी एड्रेस) की जांच करती है, तो उन्हें गुर्गों की लोकेशन के फर्जी डेटा मिलते हैं। इस कारण पुलिस को जांच में भारी बाधा आ रही है।
सोशल मीडिया बना भटकाने का हथियार
इस नए साइबर नेक्सस का सबसे बड़ा हथियार सोशल मीडिया बन गया है। किसी भी बड़ी वारदात या हमला करने के तुरंत बाद गैंगस्टर के गुर्गे सोशल मीडिया पर पोस्ट करके हमले की जिम्मेदारी लेते हैं। ताकि उनका लोगों में भय हो और उनको रुपये आसानी से मिलते रहे। इस पोस्ट में भी जालसाजी होती है।
वे ऐसे टूल्स का इस्तेमाल करते हैं जो पोस्ट के साथ जियो-टैगिंग और आईपी एड्रेस को बदल देते हैं। जब पुलिस इन सोशल मीडिया पोस्ट की तकनीकी जांच करती है, तो उन्हें पता चलता है कि पोस्ट की लोकेशन या तो कोई दूसरा राज्य है या कई बार तो कोई दूसरा देश। इस डिजिटल धोखे से पुलिस का एक बड़ा हिस्सा गलत लोकेशन पर जांच में लग जाता है, जिससे गैंगस्टर को सबूत मिटाने और सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचने का पर्याप्त समय मिल जाता है।
50 से ज्यादा गैंगस्टर विदेश से गैंग को संचालित कर रहे
एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक हरियाणा के कई मामलों में 50 से अधिक गैंगस्टर वांटेड हैं, जो वर्तमान में विदेश से अपने पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहे हैं। ये गैंगस्टर मध्य पूर्व, कनाडा और यूरोपीय देशों में सुरक्षित ठिकाने बनाकर, वहीं से रंगदारी वसूलने, हत्या की साजिश रचने और जबरन वसूली जैसे अपराधों को नियंत्रित कर रहे हैं। इन विदेशी ठिकानों से ऑपरेट करने वाले ये अपराधी न केवल पुलिस की पहुंच से दूर हैं, बल्कि अपने आपराधिक नेटवर्क को भी तेज़ी से बढ़ा रहे हैं। उनके पास अंतर्राष्ट्रीय कॉल और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करने के कारण भारतीय एजेंसियों के लिए उन्हें ट्रेस करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
ठिकानों की पहचान की जा रही
इस खतरे से निपटने के लिए एसटीएफ ने एक व्यापक डिपोर्टेशन ड्राइव शुरू की है। पुलिस ने गैंगस्टरों की विदेशी लोकेशन ट्रेस करने के बाद उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करना और संबंधित देशों के साथ म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी का उपयोग करना शामिल है।
एसटीएफ ने की है पूछताछ
यह पूरी साजिश तब सामने आई जब हाल ही में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा डिपोर्ट कर लाए गए एक प्रमुख गैंगस्टर से गहन पूछताछ की गई। उस गैंगस्टर ने इस बात का खुलासा किया कि कैसे उन्हें विशेष रूप से डिजिटल सुरक्षा और एन्क्रिप्शन के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है ताकि पुलिस उनके नियंत्रण केंद्र तक न पहुंच सके।





