Delhi Rape: निर्भया की तरह दिल्ली में फिर चलती बस में गैंगरेप, टाइम पूछने के बहाने खींचा; 2 घंटे तक दरिंदगी

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली के रानी बाग इलाके में सोमवार देर रात इंसानियत को शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है। 30 साल की एक महिला का अपहरण कर चलती हुई स्लीपर बस में गैंगरेप किया गया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बस को जब्त कर लिया है और पीड़िता के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।

Delhi Rape: निर्भया की तरह दिल्ली में फिर चलती बस में गैंगरेप, टाइम पूछने के बहाने खींचा; 2 घंटे तक दरिंदगी

दिल्ली में निर्भया कांड की यादें एक बार फिर ताजा हो गईं। रानी बाग इलाके में सोमवार देर रात 30 साल की एक महिला का अपहरण कर चलती हुई स्लीपर बस में गैंगरेप किया गया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बस को जब्त कर लिया है और पीड़िता के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।

समय पूछने के बहाने बस में खींचा

पीड़िता रजिया (परिवर्तित नाम) पीतमपुरा की झुग्गियों में रहती है और मंगोलपुरी की एक फैक्टरी में काम करती है। सोमवार रात काम खत्म कर वह पैदल अपने घर लौट रही थी। जब वह सरस्वती विहार के बी-ब्लॉक बस स्टैंड के पास पहुंची, तो वहां एक स्लीपर बस रुकी। पीड़िता ने बस के दरवाजे पर खड़े एक युवक से समय पूछा, लेकिन जवाब देने के बजाय आरोपियों ने उसे जबरन बस के भीतर खींच लिया।

सात किलोमीटर दूर ले गए

पीड़िता के अनुसार, बस के अंदर खींचते ही आरोपियों ने दरवाजा बंद कर दिया और चालक को बस चलाने के लिए कहा। चलती बस में दो युवकों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। यह घटनाक्रम नांगलोई मेट्रो स्टेशन तक करीब सात किलोमीटर तक चलता रहा। करीब दो घंटे तक यौन शोषण करने के बाद, रात करीब दो बजे आरोपियों ने पीड़िता को खून से लथपथ हालत में सड़क पर फेंक दिया और फरार हो गए।

मेडिकल परीक्षण में रेप की पुष्टि

वारदात के बाद पीड़िता ने तुरंत पुलिस को फोन किया। शुरुआती कॉल नांगलोई पुलिस स्टेशन को गई, लेकिन घटनास्थल रानी बाग थाना क्षेत्र का होने के कारण मामला वहां ट्रांसफर किया गया। सूचना मिलते ही रानी बाग पुलिस सक्रिय हुई। एक महिला उप-निरीक्षक ने पीड़िता को बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल पहुंचाया, जहां मेडिकल परीक्षण में रेप की पुष्टि हुई है।

भर्ती होने से इनकार

अस्पताल में डॉक्टरों ने पीड़िता की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे भर्ती होने की सलाह दी थी, लेकिन उसने इनकार कर दिया। पीड़िता ने बताया कि उसके पति टीबी के मरीज हैं और घर पर ही रहते हैं। उसकी 8, 6 और 4 साल साल की तीन बेटियां हैं। अगर वह अस्पताल में भर्ती हो जाती, तो बच्चों को खाना कौन खिलाएगा। आर्थिक तंगी और बच्चों की जिम्मेदारी के कारण वह गंभीर चोटों के बावजूद घर से ही इलाज करा रही है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाले रही पुलिस टीम

पुलिस ने बिहार के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली बस को कब्जे में ले लिया है। बस मालिक से संपर्क कर चालक और दोनों मुख्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल इलाके के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि बस के रूट और आरोपियों की गतिविधियों की पुष्टि हो सके।

बस के अंदर पर्दे लगे थे

पुलिस अधिकारी ने बताया कि बस के रुट को खंगाला जा रहा है। इसके अलावा यह भी पाया गया है कि बस में पर्दे लगे थे, जिसकी वजह से अंदर दिखाई नहीं दे रहा था। पुलिस ने बस के अंदर से सबूत जमा करने के लिए फारेंसिक टीम को बुलाया। बस जब्त कर ली है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

बता दें कि 16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में 23 साल की फिजियोथेरेपी की छात्रा निर्भया के साथ चलती बस में हुए जघन्य गैंगरेप और हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस बर्बर घटना के खिलाफ देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस मामले में 20 मार्च 2020 को चारों दोषियों को फांसी दी गई थी।

रिपोर्टः हेमंत कुमार पांडेय

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लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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