दिल्ली में लुटेरों के गैंग का भंडाफोड़, 200 CCTV की मदद से सरगना असलम तक पहुंची पुलिस; 4 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय लुटेरों के एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गैंग के सरगना समेत 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की।

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय लुटेरों के एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गैंग के सरगना समेत 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि उसने करोल बाग से लुटेरों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है और कथित सरगना समेत चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। 16 फरवरी को करोल बाग में एक मामला दर्ज किया गया था। एक आदमी ने सर गंगा राम अस्पताल के पास मारपीट और लूटपाट की शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित द्वारका से खरीदारी के लिए करोल बाग आया था। उसी दौरान दो लोगों ने उससे संपर्क किया और बातचीत शुरू करने की कोशिश की। उन्होंने उसका विश्वास जीतने के लिए उसे नोटों जैसे दिखने वाले नकदी के बंडल दिखाए। साथ ही कहा कि इन नोटों को जमा कराने में मदद करने पर वे उसे कुछ पैसे देंगे।
जब उस आदमी को शक हुआ और उसने अस्पताल की ओर जाने की कोशिश की तो आरोपियों ने कथित तौर पर उसका पीछा किया। उसे जंगल क्षेत्र में टूटी हुई चारदीवारी की ओर धकेला और ईंट से उसके सिर पर वार करके उसे घायल कर दिया। आरोपियों ने उसका आईफोन छीन लिया और फरार हो गए।
पुलिस ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए एक टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने करोल बाग, सोनिया विहार और बवाना में लगे 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। लूटे गए फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण से आरोपियों की पहचान करने में मदद मिली।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों को पीतमपुरा के पास एक वैन में खोजा गया और थोड़ी देर पीछा करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अपराध में इस्तेमाल की गई वैन और चोरी किया गया मोबाइल फोन उनसे बरामद किया गया। आरोपियों की पहचान इबरार (23), सुलेमान (22), आशिक खान (27) और असलम (34) के रूप में हुई है। ये सभी बवाना के निवासी हैं। असलम गिरोह का सरगना है।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे नकली नोटों के बंडल बनाते थे, जिनके ऊपर असली 500 रुपये का नोट रखा होता था। लोगों को नकद देने का वादा करके उनसे ऑनलाइन भुगतान करवा लेते थे। जब पीड़ित विरोध करते थे तो वे मारपीट और छीन-झपट का सहारा लेते थे। अधिकारी ने बताया कि असलम के खिलाफ धोखाधड़ी और चोरी के कई मामले पहले से दर्ज हैं, जबकि सुलेमान भी एक पुराने आपराधिक मामले में शामिल है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


