
BMW वाली गगनप्रीत ने नवजोत सिंह की मौत के लिए 2 और लोगों को बताया दोषी
बुधवार को अदालत में दोनों पक्षों की बहस के दौरान आरोपी और पीड़ित पक्ष की कई दलीलें सामने आईं। गगनप्रीत ने इस मामले में दो अन्य लोगों को दोषी बताते हुए उन्हें भी आरोपी बनाने की मांग की है।
वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी नवजोत सिंह की बीएमडब्ल्यू हादसे में मौत के बाद गिरफ्तार की गई गगनप्रीत कौर को अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग ने 38 वर्षीय गगनप्रीत कौर के अदालत में पेश होने के बाद उसकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। उसे 27 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बुधवार को अदालत में दोनों पक्षों की बहस के दौरान आरोपी और पीड़ित पक्ष की कई दलीलें सामने आईं। गगनप्रीत ने इस मामले में दो अन्य लोगों को दोषी बताते हुए उन्हें भी आरोपी बनाने की मांग की है।

रविवार 14 सितंबर को बाइक से पत्नी संग घर जाते हुए वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेट्री नवजोत की हादसे में मौत हो गई। आरोप है कि तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू से टक्कर की वजह से नवजोत की जान चली गई। गगनप्रीत को इसलिए भी ज्यादा गुनहगार माना जा रहा है क्योंकि हादसे के बाद वह घायलों को एक वैन से घटनास्थल से 19 किलोमीटर दूर जीटीबी नगर के एक अस्पताल में ले गई जो उसके बुआ के बेटे का है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यदि नवजोत को पास के किसी अस्पताल में ले जाया जाता तो उनकी जान बच सकती थी।
गगनप्रीत कौर की ओर सेया है। उन्होंने कहा, 'जांच अधिकारी ने जब केस दर्ज किया तो उनका मानना था कि आरोपी कार को गलत और लापरवाह तरीके से चला रही थी।' वकील ने दलील दी कि कार में हादसे के वक्त गगनप्रीत के बच्चे भी थे।
डीटीसी से भी टक्कर, एंबुलेंस का इनकार: गगनप्रीत
गगनप्रीत की ओर से वकील ने दावा किया कि नवजोत सिंह के दोपहिया वाहन को डीटीसी की एक बस ने भी टक्कर मारी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस बस को क्यों नहीं जब्त किया गया है? अधिवक्ता ने कहा, ‘उसके बाद वहां एक एम्बुलेंस रुकी थी, लेकिन उसने घायलों को अस्पताल ले जाने से इनकार कर अदालत में पेश हुए वकील रमेश गुप्ता ने कहा कि एक हादसे के मामले को गैर इरादतन हत्या के मामले में बदला ग दिया...मेडिकल वैन रुकी या नहीं इसकी पुष्टि करना क्या डीसीपी की ड्यूटी नहीं है?’ गगनप्रीत ने डीटीसी बस और एंबुलेंस के चालक को भी दोषी बताते हुए उन्हें आरोपी बनाने की मांग की।
सीसीटीवी संरक्षित करने की मांग
कौर की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने दुर्घटना के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने के लिए एक याचिका दाखिल की, जिसके लिए अदालत ने नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई गुरुवार के लिए निर्धारित की।
कौर का इरादा गलत था: पीड़ित पक्ष के वकील
इस मामले में शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने गुप्ता की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि कौर गंभीर रूप से घायल नहीं थीं और यह जानते हुए भी कि जब कोई गंभीर रूप से घायल होता है तो हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसके बावजूद वह वैन चालक से घायल को 20 किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल ले कर गईं। वकील ने दावा किया कि कौर का इरादा गलत था। पीड़िता के अधिवक्ता ने कहा, ‘इसके बाद महिला (कौर) अस्पताल के आईसीयू में एडमिट हो जाती हैं... पांच घंटे बाद फर्जी ‘मेडिको-लीगल केस’ (एमएलसी) बना रही हैं...।’
उन्होंने कहा, ‘‘एक तो बहुत तेज गाड़ी चला रही थीं, सोचो रफ्तार कितनी अधिक होगी की इससे बीएमडब्ल्यू ही पलट गई... करोड़ रुपये की गाड़ी चलाओगे तो खुद सुरक्षित रहोगे ही, लेकिन जिसको लगी है उनको सहायता प्रदान कराओगे ना।’
भाषा इनपुट के साथ





