जिस दोस्त को मरा बताया वो निकला जिंदा, कोर्ट को गुमराह करने वाले जमानती पर FIR दर्ज

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, राजन शर्मा
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दिल्ली में गैर जमानती वारंट पर पकड़े गए एक आरोपी की जमानत लेने वाले दोस्त पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगा है। जज ने पुलिस की रिपोर्ट से सच सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

Punjab and Haryana High Court

दोस्ती निभाने के लिए एक शख्स ने अदालत में अपने दोस्त को बचाने के लिए उसे मृत बता दिया। अदालत ने जब उसके दावे की जांच कराई तो दिल्ली पुलिस ने आरोपी को जिंदा पाया। अब इस मामले में आरोपी के दोस्त पर कोर्ट को गुमराह करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

साकेत थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि संगम विहार में रहने वाले रविंद्र उर्फ लाला पर वर्ष 2017 में संगम विहार थाने में एक केस दर्ज हुआ था। जिसकी सुनवाई साकेत कोर्ट में चल रही है। इस मामले में रविंद्र जमानत मिलने पर जेल से बाहर आ गया था। उसकी जमानत संगम विहार निवासी धन्ना लाल ने दी थी। जमानत मिलने के बाद रविंद्र ने कोर्ट आना बंद कर दिया। 9 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान जब आरोपी पेश नहीं हुआ तो कोर्ट ने उसके जमानती धन्ना लाल को तलब कर लिया। धन्ना लाल ने कोर्ट को बताया कि आरोपी रविंद्र उर्फ लाला की मौत हो चुकी है। उसके बयान के बाद अदालत ने इस मामले की पुष्टि के लिए संबंधित थाना प्रभारी से आरोपी की मौत की जांच रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में सामने आया कि धन्ना लाल का दावा सही नहीं था। आरोपी की मौत नहीं हुई थी, बल्कि वह फरार चल रहा था।

अदालत के आदेश पर जमानती के खिलाफ एफआईआर दर्ज

अदालत ने पुलिस रिपोर्ट को देखने के बाद माना की मामले में जमानती धन्ना लाल ने अपने दोस्त को बचाने के लिए अदालत के सामने जानबूझकर गलत जानकारी दी थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की गलत जानकारी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है और अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने के समान है। कोर्ट के निर्देश पर साकेत थाना पुलिस ने 9 जुलाई को जमानती धन्ना लाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि धन्ना लाल ने किस उद्देश्य से आरोपी को मृत बताया था और इसके पीछे क्या साजिश थी।

‘सहआरोपी को नहीं विरोध का अधिकार’

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक केस में फैसला सुनाया है कि किसी आपराधिक मामले में सह-आरोपी के सरकारी गवाह बनकर माफी मांगने की अर्जी का विरोध करने का अधिकार दूसरे आरोपी को नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के पास ट्रायल के दौरान सरकारी गवाह बने सह-आरोपी से जिरह करने का पूरा अवसर होता है, ताकि उसके बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जा सके। जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने फैसले में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 306 के तहत हर सह-आरोपी को सुनवाई का अधिकार नहीं दिया गया है। अदालत ने कहा कि माफी देने से सह-आरोपी को कोई सीधा नुकसान नहीं होता है।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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