
सफदरजंग अस्पताल में फ्री न्यूरो मॉड्यूलेशन सुविधा शुरू, मनोरोगियों का नई तकनीक से होगा मुफ्त इलाज
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में निशुल्क न्यूरो मॉड्यूलेशन सुविधा की शुरुआत की गई है। इससे मानसिक बीमारियों से पीड़ित जिन मरीजों को इलाज में दवाओं से फायदा नहीं होता उनका अत्याधुनिक न्यूरो मॉड्यूलेशन के जरिये इलाज हो सकेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) के मनोचिकित्सा विभाग में निशुल्क न्यूरो मॉड्यूलेशन सुविधा की शुरुआत की गई है। इससे मानसिक बीमारियों से पीड़ित जिन मरीजों को इलाज में दवाओं से फायदा नहीं होता उनका अत्याधुनिक न्यूरो मॉड्यूलेशन के जरिये इलाज हो सकेगा। मरीजों को यह सुविधा निशुल्क मिलेगी।
इससे विभिन्न मानसिक बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मरीजों को राहत मिलेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार न्यूरो मॉड्यूलेशन केंद्र में अत्याधुनिक आरटीएमएस (रिपिटिटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन), एमईसीटी (मॉडिफाइड इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी) और टीडीसीएस (ट्रांसक्रैनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन) मशीन लगाई गई है।
अवसाद, अल्जाइमर, ओसीडी, सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों के इलाज में इस तकनीक का इस्तेमाल होता है। इससे मिर्गी, कमर दर्द सहित कई बीमारियों का भी इलाज संभव है। मौजूदा समय में सरकारी क्षेत्र के बहुत कम अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है। इस वजह से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मरीजों को इस तकनीक से इलाज करा पाना आसान नहीं होता।
अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि अस्पताल का प्रयास है कि वित्तीय बाधाओं के कारण मरीज आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से वंचित न होने पाएं। इसे ध्यान में रखकर यह सुविधा शुरू की गई है।
एक सेशन में लगता है 20 मिनट : अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज वर्मा ने कहा कि न्यूरो मॉड्यूलेशन की मशीनों में छोटा मैग्नेट होता है। इसके जरिये मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से को स्टिमुलेट किया जाता है। इससे बीमारी के लक्षण कम हो जाते हैं। इसे एक बार कराने में करीब 20 मिनट लगते हैं। सप्ताह में इसे तीन दिन करना होता है।
मरीज की बीमारी की गंभीरता के आधार पर यह थेरेपी देने की अवधि तय की जाती है। निजी अस्पतालों में इससे इलाज का खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये है, जबकि सफदरजंग अस्पताल में निशुल्क है। बार-बार आत्महत्या का ख्याल आने की स्थिति में इलाज के लिए एमईसीईडी का इस्तेमाल होता है।
दोगुने हुए मरीज
डॉ. वर्मा ने बताया कि पहले अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में वर्ष भर में 40 से 45 हजार के करीब मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे। अब पिछले दो-तीन वर्षों से ओपीडी में 80 हजार के लगभग मरीज पहुंचते हैं।
छोटी मशीनें भी उपलब्ध
डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि अस्पताल में लगाई गई मशीनें तो महंगी और बड़ी हैं। इसका इस्तेमाल गंभीर मानसिक बीमारियों के इलाज में किया जाता है लेकिन बाजार में पेन ड्राइव व हेलमेट की तरह छोटी मशीनें मुहैया हो गई हैं।
मिलता है जल्दी आराम
सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सक बताते हैं कि न्यूरो मॉड्यूलेशन गंभीर मानसिक बीमारियों के इलाज में बेहतर विकल्प के रूप में उभर रहा है। दवा प्रतिरोधक सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में भी इसका अच्छा असर देखा गया है। जब दवा मरीज पर असर करना छोड़ देती है तब इस तकनीक से उन मरीजों के इलाज से फायदा होता है। जिन मरीजों पर दवाएं असर कर रही होती हैं वे भी इस तकनीक से इलाज क विकल्प चयन कर सकते हैं। क्योंकि इस तकनीक से इलाज करने पर मरीज को बीमारियों के लक्षण से जल्दी राहत मिलती है।





