
दिल्ली में 4 दिन से लापता थी 4 साल की बच्ची, नाले में पड़ी मिली लाश; मां को किस बात का संदेह
दिल्ली में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। 4 दिन पहले लापता 4 साल की बच्ची की लाश नाले से बरामद की गई। पुलिस ने उसे ढूंढ़ने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। मां को संदेह था कि उसकी बेटी या तो लापता है या उसे किडनैप कर लिया गया है।
दिल्ली में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। 4 दिन पहले लापता 4 साल की बच्ची की लाश नाले से बरामद की गई। पुलिस ने उसे ढूंढ़ने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। मां को संदेह था कि उसकी बेटी या तो लापता है या उसे किडनैप कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली के प्रेम नगर से लापता हुई चार साल की बच्ची सोमवार को एक नाले में मृत पाई गई। पुलिस ने बताया कि बच्ची के लापता होने की सूचना 9 जनवरी को दी गई थी। किराड़ी की रहने वाली उसकी मां ने प्रेम नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। मां को संदेह था कि उसकी बेटी या तो लापता है या उसका अपहरण कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई और तलाशी अभियान शुरू किया गया। जांच के दौरान पुलिस टीमों ने तलाशी अभियान चलाया और सभी संबंधित एजेंसियों को सूचना दी। तकनीकी निगरानी का इस्तेमाल किया गया और खोजी कुत्तों की टीम से भी सहायता ली गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रेम नगर क्षेत्र में जल निकायों और नालों की तलाशी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।
पुलिस ने बताया कि 12 जनवरी को बच्ची के माता-पिता के साथ चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान विद्यापति नगर के ध्रुव पिकेट के पास एक नाले में बच्ची डूबी हुई मिली। उन्होंने बताया कि बच्ची को बाहर निकाला गया। बच्ची के माता-पिता ने मौके पर ही उसकी पहचान कर ली।
बच्ची को मंगोल पुरी स्थित संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया कि शव को मोर्चरी में भेज दिया गया है। मौके का मुआयना करने, फोटोग्राफी करने और अन्य जांच करने के लिए रोहिणी से एक मोबाइल क्राइम टीम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) टीम को बुलाया गया।
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बच्ची के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई है। प्रथम दृष्टया मामला डूबने का प्रतीत होता है। मामले में आगे की जांच जारी है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




