दिल्ली में CCI के पूर्व चेयरमैन की दम घुटने से मौत, दमकल टीम की देरी पर सवाल; पड़ोसी ने क्या बताया
दिल्ली में एक पूर्व शीर्ष नौकरशाह की मौत ने फायर ब्रिगेड की देरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लोगों और पड़ोसियों का आरोप है कि आग लगने के करीब 50 मिनट बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हौज खास स्थित घर में आग लगने से सीसीआई के पूर्व चेयरमैन की मौत हो गई थी।

दिल्ली में एक पूर्व शीर्ष नौकरशाह की मौत ने फायर ब्रिगेड की देरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लोगों और पड़ोसियों का आरोप है कि आग लगने के करीब 50 मिनट बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हौज खास स्थित घर में आग लगने से सीसीआई के पूर्व चेयरमैन की मौत हो गई थी।
50 मिनट बाद दमकल की गाड़ियां पहुंचीं
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के पहले चेयरमैन धनेंद्र कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। माना जा रहा है कि बुधवार रात उनके हौज खास स्थित घर में एसी फटने से आग लग गई थी। परिवार के लोगों, घरेलू सहायकों और पड़ोसियों का आरोप है कि आग लगने के करीब 50 मिनट बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
एसी में धमाके बाद आग लगी
घर में काम करने वाले अभिषेक ने एचटी को बताया कि हमें नहीं पता कि अगर वे समय पर पहुंच जाते तो क्या कुमार सर की जान बच पाती, लेकिन वे बहुत देर से पहुंचे। हौज खास एन्क्लेव स्थित उनके घर में बुधवार रात करीब 11 बजे आग लगी थी। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि आग कुमार के बेटे गौरव के कमरे में लगे एयर-कंडीशनर की इनडोर यूनिट में धमाका होने के बाद लगी।
अग्निशामक यंत्र मौजूद नहीं था
आस पड़ोस के लोगों ने बताया कि दमकलकर्मियों के पहुंचने से पहले उन्होंने आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की। एक पड़ोसी ने बताया कि लोगों ने पाइप, बाल्टी और पानी का इस्तेमाल करने की कोशिश की, क्योंकि आसपास कोई अग्निशामक यंत्र मौजूद नहीं था। उन्होंने पीटीआई को बताया कि हम सभी पाइप, बाल्टियों और पानी का इस्तेमाल करके आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। यह कोई झुग्गी-झोपड़ी वाला इलाका नहीं है। यहां की गलियां एकदम सही हैं। अंकल इतने बड़े पद पर रहे हैं, फिर भी उन तक मदद पहुंचने में इतना समय लग गया। फिर इतनी ज्यादा आबादी वाले देश में एक आम आदमी का क्या होगा?
हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं है
वहां रहने वाली एक महिला ने बताया कि आग बुझाने की कोशिश करते हुए उन्होंने स्थानीय आरडब्ल्यूए ग्रुप में मैसेज भेजकर आग बुझाने वाले यंत्र मांगे। उन्होंने पीटीआई को बताया कि हम जानते हैं कि इस देश में फायर ब्रिगेड को पहुंचने में समय लगता है। आप चाहे कुछ भी कर लें समय तो लगता ही है। हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं है। मैं सब कुछ तो नहीं कह सकती, लेकिन हमारे देश का सिस्टम टूट चुका है। यह बात हर कोई जानता है। इस बात से इनकार करने का कोई मतलब नहीं है। हम टैक्स देने वाले नागरिक हैं फिर भी फायर ब्रिगेड को पहुंचने में समय लगता है।
दक्षिण दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि पीसीआर कॉल मिलने के बाद पुलिस और आपातकालीन कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। लोगों और पुलिसकर्मियों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया।
वॉशरूम में बेहोश मिले
79 साल के धनेंद्र कुमार घर में अपनी पत्नी, बेटे और दो घरेलू सहायकों के साथ थे। उसी दौरान आग लग गई। पुलिस ने बताया कि वह वॉशरूम में बेहोश मिले। माना जा रहा है कि उन्होंने सांस के रूप में बहुत ज्यादा धुंआं ले लिया था। उनके शरीर पर जलने के कोई निशान नहीं थे। उन्हें उनके बेटे गौरव के साथ एम्स के ट्रॉमा सेंटर में ले जाया गया। कुमार की गुरुवार सुबह मौत हो गई। गौरव अब खतरे से बाहर हैं।
धनेंद्र कुमार के मैनेजर सेजवाल ने बताया कि गौरव के कमरे में एसी यूनिट फटने के बाद आग तेजी से फैल गई। जब आग लगी तब कुमार सर वॉशरूम में थे। गौरव ने सबसे पहले अपनी व्हीलचेयर पर निर्भर मां को घर से बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद वह अपने पिता को ढूंढ़ने के लिए दो घरेलू सहायकों के साथ वापस घर के अंदर गए, लेकिन तब तक कुमार वॉशरूम में गिर चुके थे।
उन्होंने बताया कि आखिरकार उन तीनों ने कुमार को घर से बाहर निकाल लिया, लेकिन वह बेहोश थे। पुलिस ने घर का मुआयना किया और कहा कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी का कोई शक नहीं है। आग लगने की सही वजह का पता बिजली के उपकरणों की जांच के बाद ही चलेगा।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


