मैंने रिस्क लिया और लोगों ने पागलपन समझा, दिल्ली पुलिस की SI की नौकरी छोड़कर नई पहचान बनाई
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के एक फैसले ने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी। जब उन्होंने सब इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर कुछ नया करने का रिस्क लिया तो लोगों ने इसे उनका पागलपन समझा। लेकिन, आज वो ऑस्ट्रेलिया में एक सफल रियल एस्टेट एजेंट की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने अनुभव शेयर किए हैं।

किसी नए देश में नई शुरुआत कर सफलता हासिल करना काफी मुश्किल होता है। इसके लिए अपनी पुरानी पहचान या रुतबे को भी छोड़ना पड़ता है। लेकिन, दिल्ली पुलिस के एक पूर्व अधिकारी के लिए इस बदलाव ने उनकी जिंदगी ही बदल दी। दिल्ली पुलिस के पूर्व सब-इंस्पेक्टर निशांत तोमर ने हाल ही में भारत में अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़कर ऑस्ट्रेलिया जाने और रियल एस्टेट एजेंट बनने के अपने सफर के बारे में बताया।
निशांत तोमर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के कैप्शन में जो लिखा वह वायरल हो चुका है। उन्होंने लिखा कि कुछ साल पहले मैंने एक ऐसा रिस्क लिया जिसे बहुत से लोगों ने पागलपन समझा। मैंने भारत में अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़ दी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बावजूद ऑस्ट्रेलिया चला गया। वहां जाकर बिल्कुल शुरुआत से काम शुरू किया, चुनौतियों का सामना किया, अपना घर बनाया और आज मैं दूसरे परिवारों को ऑस्ट्रेलिया में अपना पहला घर खरीदने का सपना पूरा करने में मदद कर रहा हूं।
उनकी कहानी ने उन कई भारतीयों के दिलों को गहराई से छुआ है जो विदेशों में इसी तरह के दबावों का सामना करते हैं। जैसे कि तरह-तरह की अनिश्चितताएं, अकेलेपन का भावनात्मक बोझ, एक सम्मानित करियर से हटकर शुरुआती स्तर का काम करना और शून्य से सब कुछ फिर से शुरू करने की प्रक्रिया। तोमर ने आगे लिखा कि उनका यह नया सफर किस्मत की बात नहीं थी। यह रिस्क उठाने, नए देश में ढलने और मुश्किल समय में भी हार न मानने के बारे में था।
उन्होंने लिखा क अगर आप विदेश जाने, अपना पहला घर खरीदने की सोच रहे हैं या बस यह सबूत चाहते हैं कि जिंदगी कुछ ही सालों में पूरी तरह बदल सकती है तो यह वीडियो आपके लिए है। उन्होंने एक सलाह के साथ अपनी बात खत्म की। उन्होंने लिखा कि कभी-कभी सबसे बड़े मौके उन फैसलों से मिलते हैं जिनसे आपको सबसे ज्यादा डर लगता है।
निशांत का यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। इसे 57000 से ज्यादा बार देखा गया और 1300 से ज्यादा लाइक्स मिले। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स में उत्सुकता जगा दी। कई लोगों ने कमेंट करके उनके करियर में आए बदलाव के बारे में पूछा। एक यूजर ने पूछा कि इस्तीफा देने के बाद ऑस्ट्रेलिया में नौकरी पाने के लिए आपने कौन सी नौकरी या कोर्स किया? एक अन्य यूजर ने कहा कि यह सुनकर अच्छा लगा। भगवान आपका भला करे।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


