'आप खुद हट जाइए' की मांग ले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने फिर बहस करेंगे केजरीवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक एक बार फिर अदालत में खुद अपनी दलीलें पेश करेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट में कथित शराब घोटाले से जुड़े केस में वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने दलीलें पेश करेंगे।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक एक बार फिर अदालत में खुद अपनी दलीलें पेश करेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट में कथित शराब घोटाले से जुड़े केस में वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने दलीलें पेश करेंगे। दिलचस्प यह है कि उनकी मांग है कि जस्टिस शर्मा को इस केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की ओर से यह मांग खारिज किए जाने के बाद केजरीवाल ने याचिका दायर की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त किए गए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोगों की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें अनुरोध किया गया है कि अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को अलग किया जाए। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अपनी याचिका पर दलील देंगे, जिसकी सुनवाई दोपहर ढाई बजे न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष होगी।
न्यायाधीश ने छह अप्रैल को खुद को मामले से अलग करने के आप प्रमुख के आवेदन को रिकॉर्ड में लिया था और इसे 13 अप्रैल की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। केजरीवाल ने न्यायमूर्ति शर्मा को मामले से अलग करने का अनुरोध करते हुए दावा किया है कि इस बात की गंभीर, वास्तविक और उचित आशंका है कि उनके समक्ष मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ नहीं होगी।
सीबीआई को लगाई थी फटकार
केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक समेत अन्य आप नेताओं ने भी
न्यायाधीश को मामले से अलग करने के लिए आवेदन दायर किए हैं। विजय नायर और अरुण रामचंद्र पिल्लई सहित अन्य प्रतिवादियों ने भी इसी तरह के आवेदन दायर किए हैं। अधीनस्थ अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ।
ट्रायल कोर्ट ने कर दिया आरोप मुक्त
न्यायमूर्ति शर्मा ने नौ मार्च को सीबीआई की उस याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने आरोपियों को आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ अपील की थी। उन्होंने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अधीनस्थ अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होते हैं और उन पर विचार करने की आवश्यकता है।
हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी मांग
उन्होंने शराब नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू किये जाने की अधीनस्थ अदालत की सिफारिश पर भी रोक लगा दी। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई को न्यायमूर्ति शर्मा से किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित किये जाने से जुड़े केजरीवाल के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस मामले से अलग होने का निर्णय संबंधित न्यायाधीश को लेना है।
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