केजरीवाल कातिया है और राघव काशीनाथ, AAP के पूर्व नेता ने कहा- पूरा मामला उगाही के पैसे से जुड़ा है

Subodh Kumar Mishra एएनआई, रोहतक
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आप नेता राघव चड्ढा से जुड़े विवाद पर पार्टी के पूर्व नेता नवीन जयहिंद का कहना है कि ये केजरीवाल के मालदार और राजदार है। यह केजरीवाल का अमीर और वफादार करीबी है। असली विवाद पंजाब और दिल्ली से की जा रही उगाही को लेकर है। नवीन ने दोनों के नार्को टेस्ट की भी मांग कर दी।

केजरीवाल कातिया है और राघव काशीनाथ, AAP के पूर्व नेता ने कहा- पूरा मामला उगाही के पैसे से जुड़ा है

आप नेता राघव चड्ढा से जुड़े विवाद पर पार्टी के पूर्व नेता नवीन जयहिंद का कहना है कि ये केजरीवाल के मालदार और राजदार है। यह केजरीवाल का अमीर और वफादार करीबी है। असली विवाद पंजाब और दिल्ली से की जा रही उगाही को लेकर है। उसे उगाही का पैसा इकट्ठा करके उसे सिंगापुर पहुंचाना था, लेकिन वह इंग्लैंड लेकर चला गया था। इस दौरान दिल्ली में उसे मुर्गा बनाकर पीटा गया था। उसके बाद उसे चंडीगढ़ के एक गुप्त कोठी में भी उसकी पिटाई की गई थी।

आप के पूर्व नेता ने कहा कि यह पूरा मामला पैसे और भ्रष्टाचार का है, और कुछ मामला नहीं है। नवीन ने कहा कि कल जो उसने वीडियो डाली थी कि मैं दरिया हूं, सैलाब आएगा तो ये रोया था बेचारा। इसकी आंख में चोट लगी थी। इसने इंग्लैंड में जाकर ट्रीटमेंट कराया था। इसकी आंख में इतनी चोट लगी थी कि इंडिया में तो ट्रीटमेंट भी नहीं था। इसकी दोनों आंखें नीली हो गई थी। आज जो वीडियो आया है उसमें ये कह रहा है कि मैं घायल हूं, इसलिए घातक हूं।

राघव गांडीव उठा और…

नवीन जयहिंद ने यह भी कहा कि घातक फिल्म से वो मैसेज देना चाह रहा है कि केजरीवाल कातिया है और वह काशीनाथ है। इसलिए मैं कहूंगा कि हे राघव गांडीव उठा और वो जो माल की उगाही की थी वो बता कि किसके लिए उगाही की थी। पंजाब के अंदर आईएएस-आईपीएस के ट्रांसफर और ठेके का मामला यही देखता है। उस टाइम पर केजरीवाल के साथ ये कौन सा रिश्तेदारी निभा रहा था। कौन सी रिश्तेदारी बना रहा था।

नार्को टेस्ट करवा लो पता चल जाएगा

आप के पूर्व नेता ने कहा कि हरियाणा की ब्रांड एंबेसडर परिणीति चोपड़ा के साथ इसकी शादी हुई और सारे के सारे दांव उलटा पड़ने लगा। नवीन ने कहा कि लोगों को पता चलना चाहिए। दोनों (केजरीवाल और राघव चड्ढा) का नार्को टेस्ट करवा लो पता चल जाएगा। सच्चाई यही है। दूसरी चीजों को मिसगाइड करके लोगों को गुमराह किया जा रहा है। असली मुद्दा यही है।

राघव चड्ढा पर पार्टी के तीन आरोप

बता दें कि आप आदमी पार्टी ने तीन आरोप लगाते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया है। इसके बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी करते हुए आम आदमी पार्टी के आरोपों को झूठा बताया है। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ एक साजिश रची जा रही है। राघव के मुताबिक, वो पार्लियामेंट में जनता के मुद्दे उठाने गए हैं और एक दिन उनके खिलाफ फैलाया जा रहा झूठ जरूर बेनकाब होगा।

इसलिए जवाब देने का फैसला लिया

राघव ने कहा कि पहले उन्होंने सोचा था कि उन्हें इन सबका जवाब नहीं देना चाहिए. लेकिन फिर उन्हें लगा कि एक झूठ को सौ बार बोला जाए तो कुछ लोग इसे सच न मान लें, इसलिए उन्होंने जवाब देने का फैसला लिया।

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लेखक के बारे में

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सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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