काम की बात: नोएडा में 15 साल बाद फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ, कब्जाधारकों को मालिकाना हक मिलेगा

हिन्दुस्तान, नोएडा
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नोएडा में सहकारी आवासीय समिति के फ्लैटों में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। करीब 15 साल बाद वे अपने फ्लैट के मालिक बन सकेंगे। अब कब्जेदार के नाम से फ्लैट की रजिस्ट्री हो सकेगी। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से दो हजार से अधिक लोगों को फायदा मिलेगा।

नोएडा में 15 साल बाद फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ।
नोएडा में 15 साल बाद फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ।

नोएडा में सहकारी आवासीय समिति के लोगों को करीब 15 साल बाद फ्लैट का मालिकाना हक मिल सकेगा। समिति की एनओसी, अंतरण शुल्क जमा करने और निर्धारित प्रमाणपत्रों के आधार पर कब्जेदार के नाम फ्लैट की रजिस्ट्री हो सकेगी। इस प्रस्ताव को शनिवार को हुई बोर्ड बैठक में मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय से दो हजार से अधिक लोगों को फायदा मिलेगा।

अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-21, 25, 28, 29, 37 समेत अन्य सेक्टरों में सहकारी आवास समितियों में बहुत से ऐसे फ्लैट है, जिन्हें जिन सदस्यों को आवंटित किया गया था, उन्होंने दूसरे लोगों को ये फ्लैट बेच दिए। समितियों ने नए लोगों के नाम अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिए। बहुत से फ्लैट जीपीए के आधार पर कई बार बेचे गए, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई गई, लेकिन फ्लैट पर काबिज हैं। इससे प्राधिकरण को वित्तीय हानि ओर शासन को स्टांप ड्यूटी का नुकसान हो रहा है। एयर फोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड ने प्राधिकरण को पत्र लिखकर ऐसे 729 फ्लैट की सूची भी उपलब्ध कराई थी।

शपथपत्र देना होगा

अधिकारियों ने बताया कि रजिस्ट्री कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। जिस वर्तमान कब्जेदार के नाम रजिस्ट्री होनी है, उसको समिति की एनओसी, बीते सालों से अब तक किस-किस के पक्ष में नामांतरण किया गया उनकी सूची, फ्लैट से संबंधित विवाद होने पर पूरी जिम्मेदारी कब्जेदार की होगी, से संबंधित शपथपत्र भी देना होगा। इसके अलावा कुछ और शर्तों के साथ ही प्राधिकरण रजिस्ट्री की अनुमति देगा।

शुल्क चुकाना पड़ेगा

अधिकारियों ने बताया कि अगर एक बार फ्लैट बिका है तो ढाई प्रतिशत और तीन बार बिका है तो साढ़े सात और अधिकतम 15 प्रतिशत प्राधिकरण के आवंटन दर का अंतरण शुल्क कब्जेदार को देना होगा। तय समय में रजिस्ट्री नहीं कराने पर विलंब शुल्क भी देना होगा। प्राधिकरण की दीर्घकालीन वित्तीय स्थिरता और जलापूर्ति सफाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा शहर के मरम्मत से संबंधित कामों के लिए कॉपर्स फंड बनाया जाएगा।

वन टाइम लीज रेंट की राशि की एफडी की जाएगी

अधिकारियों ने बताया कि वन टाइम लीज रेंट से मिलने वाली राशि की एफडी की जाएगी। इस एफडी के ब्याज से कॉपर्स फंड बनाया जाएगा। यूनिफाइड पॉलिसी लागू होने से खासतौर से छोटे उद्यमियों को हस्तांतरण शुल्क, क्रियाशीलता शुल्क, परिवारिक शेयर हस्तांरण शुल्क आदि भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में पॉलिसी में संशोधन करने के लिए नोएडा-ग्रेनो के एसीईओ की एक समिति बनाते हुए रिपोर्ट देने को कहा गया है। बोर्ड बैठक में नोएडा के सीईओ कृष्णा करुणेश, ग्रेनो के सीईओ एनजी रवि, यमुना के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्राधिकरण का अधूरा टावर 315 करोड़ से पूरा होगा

सेक्टर-96 स्थित प्राधिकरण के नए दफ्तर में 12 मंजिल का टावर बनाए जाने के प्रस्ताव पर बोर्ड बैठक में मुहर लगाई गई। अभी यह चार मंजिला का बना है। इसको बनाने में 315 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके अलावा सेक्टर-145 में सूखे कचरे का वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारण करने के लिए 100 टीपीडी क्षमता का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाया जाना है। इसके लिए एजेंसी के चयन को ईओआई जारी की जाएगी।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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