दिल्ली-एनसीआर से ISI मॉड्यूल के 5 और सदस्य गिरफ्तार, निशाने पर थे पुलिसवाले; अब तक 8 दबोचे
दिल्ली पुलिस पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल पर लगातार नजर रख रही है। अब तक इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि इनके निशाने पर दिल्ली और आसपास के राज्यों में तैनात पुलिसकर्मी थे।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी-अपराधिक नेटवर्क पर कार्रवाई तेज कर दी है। इस आतंकी मॉड्यूल के पांच और सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के अनुसार यह मॉड्यूल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलर शहजाद भट्टी द्वारा संचालित किया जा रहा था। इससे पहले इसी नेटवर्क के तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। नई गिरफ्तारी के बाद मामले में कुल आठ आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
टारगेट किलिंग की योजना
स्पेशल सेल के अधिकारियों के मुताबिक गिरोह दिल्ली और आसपास के राज्यों में तैनात पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग की योजना बना रहा था। साथ ही कथित आतंकी संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (टीटीएच) के प्रचार के लिए विभिन्न स्थानों पर ग्राफिटी और पोस्टर लगाने की साजिश भी रची जा रही थी। आरोपियों के कब्जे से पांच अवैध पिस्तौल, 10 जिंदा कारतूस, पाकिस्तानी हैंडलरों के पोस्टर तथा पुलिस की रेकी से जुड़े वीडियो बरामद किए गए हैं।
लंबे समय से नजर रखी जा रही थी
पुलिस के अनुसार शहजाद भट्टी के भारतीय नेटवर्क पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। पुख्ता मानवीय खुफिया सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में एक साथ छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। स्पेशल सेल ने बताया कि इसी मॉड्यूल से जुड़े सोयब, अनमोल राय और रवि कश्यप को पहले ‘ऑपरेशन गैंग बस्ट 2.0’ के तहत गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपियों ने हथियार लहराकर पुलिसकर्मियों को धमकी देने वाले वीडियो पाकिस्तान भेजे थे।
पुलिसकर्मियों पर हमले के लिए लाखों की पेशकश
जांच में यह भी सामने आया है कि मोहम्मद कैफ और मोहम्मद रिहान को पुलिसकर्मियों, थानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने, युवाओं की भर्ती करने तथा फायरिंग और ग्रेनेड हमलों की साजिश को अंजाम देने के निर्देश मिले थे। रिहान को पुलिसकर्मियों पर हमले के लिए तीन लाख रुपये तक की पेशकश की गई थी।
छह से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दिल्ली, गाजियाबाद और पंजाब के फतेहगढ़ साहिब समेत छह से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच में सामने आया है कि नेटवर्क को चलाने और हथियारों की खरीद के लिए दुबई स्थित सहयोगियों के जरिए यूपीआई और हवाला माध्यमों से धन भेजा जा रहा था। जांच में खुलासा हुआ कि मॉड्यूल के तार जेल से भी जुड़े थे। पुलिस के अनुसार, जेल में बंद गैंगस्टर दीपक एग्रोला मोबाइल फोन के जरिए पाकिस्तान में बैठे अजमल गुज्जर के संपर्क में था। वह जेल के भीतर से अपने सहयोगियों के माध्यम से हथियारों और धन के प्रवाह को संचालित कर रहा था।
ड्रोन से पहुंचते थे हथियार
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए विदेशी हथियार और मादक पदार्थ भेजते थे। इन्हें स्थानीय नेटवर्क के जरिए दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचाया जाता था।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
1. सोहेल
बल्लभगढ़ से गिरफ्तार सोहेल ने शहजाद भट्टी के निर्देश पर दिल्ली-फरीदाबाद में टीटीएच की ग्राफिटी बनाई और उनके वीडियो भेजे। एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क में आया था। इसके लिए उसे पांच हजार रुपये मिले थे। वह कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।
2. मो. कैफ
हरियाणा के मेवात से गिरफ्तार कैफ राणा हुनैन और आबिद जट्ट के संपर्क में था। उसे पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग, पुलिस थानों व सुरक्षा शिविरों की रेकी तथा हमलों के लिए युवाओं की भर्ती का काम सौंपा गया था।
3. सोनू मीणा
दिल्ली के घिटोरनी से गिरफ्तार सोनू मीणा हसन गुज्जर के संपर्क में था। उसके पास से तीन पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। उसे हथियार उपलब्ध कराने और मॉड्यूल के सदस्यों को आर्थिक मदद पहुंचाने का जिम्मा दिया गया था। उसने सोहेल को पांच हजार रुपये भेजे थे।
4. मो. रिहान
मेरठ से गिरफ्तार रिहान आबिद जट्ट और मोहसिन के संपर्क में था। उसने आबिद जट्ट के पोस्टर लगाए थे। उसे पुलिसकर्मियों पर फायरिंग, टीटीएच ग्राफिटी बनाने और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने का काम सौंपा गया था।
5. सचिन कुमार मीणा
दिल्ली के घिटोरनी से गिरफ्तार सिचन कुमार मीणा, सोनू मीणा का सहयोगी था। उसके कब्जे से दो पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए। वह मॉड्यूल की गतिविधियों में सहयोग कर रहा था और हथियारों के नेटवर्ट से जुड़ा हुआ था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


