महिला कॉन्स्टेबल घूस लेते कैमरे में हुई थी कैद, राहत नहीं दे सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

Mar 07, 2026 07:21 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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दिल्ली हाईकोर्ट ने घूस लेने की आरोपी दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल को राहत देने से इनकार कर दिया है। आरोप है कि महिला कॉन्स्टेबल ने एक मोबाइल फोन खोने की शिकायत दर्ज करने के लिए दो सौ रुपये की रिश्वत ली थी।  

महिला कॉन्स्टेबल घूस लेते कैमरे में हुई थी कैद, राहत नहीं दे सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने घूस लेने की आरोपी दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल को राहत देने से इनकार कर दिया है। आरोप है कि महिला कॉन्स्टेबल ने एक मोबाइल फोन खोने की शिकायत दर्ज करने के लिए दो सौ रुपये की रिश्वत ली थी। हाईकोर्ट ने कहा कि घटना का वीडियो पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने की पुष्टि कर रहा है।

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल व जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने इस मामले में महिला कॉन्स्टेबल की दोबारा नौकरी पर रखे जाने की याचिका को नामंजूर कर दिया है। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला कॉन्स्टेबल और सहआरोपी हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ एक ऐसा वीडियो सबूत है, जिसे दिल्ली ही नहीं देश के अधिकांश राज्यों के निवासियों ने सीधे रिश्वत लेते देखा है। वीडियो के असली होने की पुष्टि भी हो गई है। बेंच ने कहा कि मामला पर एकतरफा है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए एक निजी टीवी चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन किया। 6 सितंबर 2005 को निजी टीवी चैनल का रिपोर्टर एक आम आदमी बन न्यू अशोक नगर थाने में गया। उसने वहां महिला कॉन्स्टेबल से मोबाइल फोन खोने की शिकायत की। महिला कॉन्स्टेबल ने शिकायत दर्ज करने के एवज में दो सौ और शिकायत पर हेड कॉन्स्टेबल के हस्ताक्षर के लिए डेढ़ सौ रुपये लिए थे। घटना का वीडियो चैनल ने 14 सितंबर को प्रसारित किया था।

रिश्वत लेने से नहीं हिचक रहे पुलिसकर्मी : कैट

इससे पूर्व महिला कॉन्स्टेबल ने नौकरी बहाली के लिए केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में याचिका दायर की थी। कैट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो साफ दिख रहा है कि रिश्वत की रकम लेते हुए दोनों पुलिस कर्मियों के चेहरे पर कोई हिचक नहीं है। कैट ने कहा कि दिल्ली ही नहीं पूरे देश ने इस घटना को होते टीवी पर देखा है। कैट ने कहा कि वीडियो की जांच हो चुकी है, जोकि सही पाई गई है। खबर 14 सितंबर को प्रसारित हुई। ऐसे में बरामदगी संभव नहीं थी। वहीं अब हाईकोर्ट ने कैट के आदेश पर मुहर लगाते हुए महिला कॉन्स्टेबल का राहत देने से इनकार कर दिया है।

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लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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