दो खबरें : मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना अब सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल
नूंह। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना को अब सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर दिया गया है और इसके तहत मिलने वाले लाभों के लिए 45 दिन की समय-सीमा निर्धारित की...

नूंह। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना को अब सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर दिया गया है और इसके तहत मिलने वाले लाभों के लिए 45 दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि इस योजना के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी को पदनामित अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी को प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी तथा संयुक्त निदेशक, अतिरिक्त निदेशक को द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी नामित किया गया है। गर्भावस्था के दौरान मजदूरी से होने वाले नुकसान की भरपाई तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह योजना चलाई गई है।
इसके तहत दूसरे बच्चे के रूप में लड़के को जन्म देने वाली अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाएं लाभ ले सकती हैं। अब 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग महिलाएं, मनरेगा जॉब कार्ड, ई-श्रम कार्ड, बीपीएल राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और किसान सम्मान निधि की लाभार्थी महिलाएं भी इस योजना की पात्रता में शामिल कर दी गई हैं। योजना के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है और आवेदन आंगनबाड़ी वर्कर या आशा वर्कर के माध्यम से किया जा सकेगा। उपायुक्त ने बताया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में मिलने वाली पांच हजार रुपये की सहायता राशि को अब तीन किस्तों की बजाय दो किस्तों में देने का निर्णय लिया गया है। ------ सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता होगी सुनिश्चित - अखिल पिलानी नूंह। प्रदेश में दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दयालु योजना-2 की शुरुआत की गई है। इसके तहत सड़क पर विचरण कर रहे पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं में मृतक या दिव्यांग व्यक्तियों के परिवारों को त्वरित और पारदर्शी आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा दयालु-2 पोर्टल लॉन्च किया है, जो सरकारी सहायता को आमजन तक पहुंचाने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से पात्र परिवारों के आवेदन तुरंत प्रसंस्कृत होंगे और सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिससे देरी या मध्यस्थता की संभावना पूरी तरह समाप्त होगी। उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि सड़क पर घूम रहे पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में प्रभावित परिवारों को एक लाख से पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि चोट लगने की स्थिति में न्यूनतम 10 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। यह योजना सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटना प्रभावित परिवारों को संकट की घड़ी में तुरंत राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी का परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत होना अनिवार्य है और नागरिक dapsy.finhry.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जहां प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य नागरिक भी आसानी से इसका उपयोग कर सकें। ---- समाप्त

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