सरकारी कार्यक्रमों के काफिलों की कारों में कटौती की तैयारी
फरीदाबाद में खाड़ी देशों में तनाव और युद्ध की आशंका के चलते प्रशासनिक व्यवस्थाओं और बैंकिंग गतिविधियों पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देश पर सरकारी कार्यक्रमों में वाहनों की संख्या कम करने की योजना बनाई गई है। बैंक में भीड़ बढ़ गई है क्योंकि लोग नकदी निकाल रहे हैं। उद्योगों में भी चिंता का माहौल है।

फरीदाबाद, धनंजय चौहान। खाड़ी देशों में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात की आशंकाओं का असर शहर की प्रशासनिक व्यवस्था, बैंकिंग गतिविधियों और औद्योगिक माहौल पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्तर से संसाधनों के सीमित उपयोग, ईंधन बचत और सतर्कता बरतने की अपील के बाद जिला प्रशासन ने सरकारी कार्यक्रमों में वाहनों के काफिलों में कटौती की कवायद शुरू कर दी है।
सरकारी कार्यक्रमों में कटौती
साथ ही लघु सचिवालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में होने वाली बैठकों को सीमित करने और वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा देने की तैयारी की है। शहर में विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को लेकर आये दिन जिला स्तर पर बैठकें की जाती हैं। इन्हें लेकर अधिकारियों को गाड़ियों से आवाजाही करने पड़ती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की खपत अधिक होती है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध के बनते हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी कार्यक्रमों में अपने काफिले कम करने का फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर पर आने वाले दिनों में सरकारी कार्यक्रमों में अधिकारियों के साथ चलने वाले अतिरिक्त वाहनों को कम किया जाएगा। अनावश्यक दौरे और औपचारिक कार्यक्रमों को भी सीमित करने की योजना है। कई विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि बैठक ऑनलाइन संभव हो तो अधिकारियों को मुख्यालय बुलाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की जाए।
बैंकों में अचानक बढ़ी भीड़
बैंकिंग सेवा से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों से संयम और सतर्कता बरतने की अपील के बाद शहर में लोगों ने नकदी निकासी बढ़ा दी है। बुधवार को शहर की कई बैंक शाखाओं और एटीएम पर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ दिखाई दी। लोगों ने बड़ी संख्या में अपने खातों से नकदी निकाली। एनआईटी, बल्लभगढ़, सेक्टर-15, सेक्टर-16 और ओल्ड फरीदाबाद क्षेत्र के बैंकों में सुबह से ही लोगों पहुंचने लगे। कई लोगों का कहना था कि वे किसी संभावित आपात स्थिति को देखते हुए घर में नकदी रखना चाहते हैं, जिससे सुबह से शाम तक भरे रहने वाले एटीएम अब दोपहर बाद ही खाली हो रहे हैं।
उद्योगों में भी चिंता का माहौल
औद्योगिक क्षेत्र में भी हालात को लेकर बेचैनी बढ़ने लगी है। उद्योगपतियों का कहना है कि पहले से गैस आपूर्ति में कमी, बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार में सुस्ती के कारण कारोबार प्रभावित चल रहा है। अब तनावपूर्ण माहौल ने उद्योग जगत की चिंता और बढ़ा दी है। उद्योग संगठनों से जुड़े पदाधिकारी रोहित रुंगटा, बीरेंद्र मेहता, हेमंत ने बताया कि यदि लंबे समय तक हालात तनावपूर्ण रहे तो परिवहन, कच्चे माल की आपूर्ति और निर्यात गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। कई उद्योग पहले ही गैस की सीमित उपलब्धता के कारण पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। सेक्टर-24, 59, आईएमटी, डीएलएफ और बाटा औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों का कहना है कि डेढ महीने चले युद्ध से कारोबार अभी पूरी तरह उबर नहीं पाया है। ऐसे में नई परिस्थितियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। छोटे और मध्यम उद्योग सबसे ज्यादा दबाव महसूस कर रहे हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि संसाधनों की उपलब्धता सामान्य रही और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित नहीं हुई तो स्थिति नियंत्रित रह सकती है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर संसाधनों के संतुलित उपयोग और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
लघु सचिवालय व अन्य स्थानों पर होने वाली सरकारी बैठकों की तैयारी
लघु सचिवालय व अन्य स्थानों पर होने वाली सरकारी बैठकों को अब जरूरी मामलों तक सीमित करने की तैयारी है। विभागों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन समीक्षा बैठकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि समय और संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।
- संजय जून, मंडलायुक्त, फरीदाबाद
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