
आदेश के एक सप्ताह बाद ही अध्यापकों को बीएलओ ड्यूटी पर लगाया
फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्यों के लिए बुलाने का आदेश दिया गया है, जिसे अध्यापकों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन बताया है। हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन ने इस आदेश का विरोध किया है और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। शिक्षा निदेशालय के आदेश के एक सप्ताह बाद ही जिले सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्याें के लिए बुला लिया गया है। शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी के लिए बुलाया गया है। अध्यापकों ने इसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन बताया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने 26 नवंबर को पत्र जारी कर गैर शैक्षणिक कार्याें में लगे अध्यापकों को वापस बुलाने के आदेश दिए थे और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 220 कक्षाएं लेना आवश्यक बताया था। इसके अलावा वार्षिक परीक्षाओं व पाठ्यक्रम को पूरा कराने का भी हवाला दिया था। शिक्षा निदेशालय के आदेश के बाद शिक्षकों ने विद्यालयों में जाकर पढ़ाई शुरू कर दिया था।

आदेश के एक सप्ताह बाद ही निर्वाचन पंजीयन अधिकारियों ने जिले के प्राथमिक शिक्षकों को दो व तीन दिसंबर को बीएलओ के कार्य के लिए स्कूलों के कार्यभार से मुक्त करवा लिया। इसका हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन ने विरोध किया है और सरकार से निर्वाचन पंजीयन अधिकारियों के खिलाफ आरटीई के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन के प्रधान चतर सिंह ने बताया कि अध्यापक का काम केवल पढ़ाना होता है। बीएलओ ड्यूटी जिला प्रशासनिक कार्य है और अध्यापकों पर अनावश्यक दबाव बनाकर करवाया जाता है। अधिकारियों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। अधिकारी स्वयं कार्यालयों में बैठकर अध्यापकों को आदेश देते रहते हैं। यह बिल्कुल गलत है और प्राइमरी टीचर एसोसिएशन बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। आवश्यकता पड़ी तो जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन भी करेगा।

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