
बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर नहीं
संक्षेप: फरीदाबाद में अध्यापकों की बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था कमजोर पड़ गई है। 378 स्कूलों में से केवल 45 प्रतिशत अध्यापक ही हाजिरी लगा रहे हैं। मशीनों की खराबी के कारण, अध्यापक अब रजिस्टर में मनमर्जी से हाजिरी लगा रहे हैं, जिससे शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
फरीदाबाद। सरकार ने अध्यापकों के विद्यालय समय पर पहुंचने के सुनिश्चित की गई बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था अब लड़खड़ाने लगे हैं। इसे लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी और अध्यापक गंभीर नहीं हैं। स्मार्ट सिटी के 378 स्कूलों के करीब 3999 अध्यापकों में मात्र 45 प्रतिशत ही बायोमेट्रिक हाजिरी लगा रहा है। शेष सभी की हाजिरी राम भरोसे है। स्मार्ट सिटी के अध्यापकों की मॉनिटरिंग एवं समय पर विद्यालय पहुंचना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की थी। यह व्यवस्था वर्ष 2015 में शुरू की गई थी। यह व्यवस्था जब शुरू की गई थी, उस समय अध्यापकों ने काफी विरोध किया था।

इसे सरकार ने सख्ती से लागू किया। इसके लागू होने के बाद से अध्यापकों ने समय पर स्कूल पहुंचना शुरू कर दिया था। यह योजना महज 10 वर्षों में दम तोड़ने लगी है। अधिकतर स्कूलों की बायोमेट्रिक हाजिरी मशीन खराब हो गई हैं। मशीन खराब होने से अध्यापकों को बायोमेट्रिक हाजिरी का झंझट से भी आराम मिल गया है। इसका लाभ उठाकर अध्यापकों ने दोबारा से स्कूल में लेट लतीफी अपनाना शुरू कर दिया है।अध्यापकों को सुबह 8:30 बजे कक्षाएं शुरू करनी होती है, लेकिन अध्यापक 9:00 बजे तक पहुंच रहे हैं। रजिस्टर पर नियमित रूप से नहीं होती हाजिरी बायोमेट्रिक हाजिरी मशीन खराब होने पर अध्यापकों रजिस्टर में हाजिरी लगाने का प्रावधान है। इसमें भी अध्यापक मनमर्जी दिखा रहे हैं। अध्यापक नियमित रूप से हाजिरी लगाने की बजाय सप्ताह या महीने में दो-तीन बार हाजिरी रजिस्टर लेकर पूरे महीने की अपनी अटेंडेस लगा देते हैं। बता दें कि बायोमेट्रिक मशीन खराब होने से अध्यापकों को सबसे अधिक लाभ यह है कि उनके ड्यूटी के घंटे नहीं गिने जा रहे। अध्यापक रजिस्टर में कभी हाजिरी लगाते हैं, जबकि बायोमेट्रिक हाजिरी में उनके हर पल का रिकॉर्ड होता है। उसके अनुरूप ही वेतन जारी किया जाता है। स्मार्ट सिटी में है 378 सरकारी स्कूल फरीदाबाद में करीब 90 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है, जबकि शेष प्राथमिक स्कूल और हाई स्कूल हैं। इनमें ढाई लाख से अधिक छात्र एवं छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। परीक्षा परिणाम पर भी पड़ता है असर अध्यापकों के समय पर स्कूल नहीं पहुंचने का प्रभाव बोर्ड परीक्षा के परिणाम पर भी पड़ता है। अध्यापक जब स्कूल विलंब से पहुंचेगा तो उसके पास छात्रों को देने के लिए पर्याप्त समय नहीं होगा। प्रत्येक छात्र की विषय संबंधी समस्या को दूर करने में असमर्थ होगा। बता दें कि फरीदाबाद बोर्ड परिणाम में पांच वर्षों से प्रदेश में 20वें स्थान पर आ रहा है। पलवल और नूंह का भी कुछ ऐसा ही हाल फरीदाबाद के अलावा पलवल और नूंह जिले का भी कुछ ऐसा ही हाल है। इन दोनों जिले के लिए भी अध्यापक बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर गंभीर नहीं है। नूंह बायोमेट्रिक हाजिरी के मामले में प्रदेश में सबसे अधिक पिछड़ा हुआ है। यहां मात्र 33 प्रतिशत स्टाफ ही बायोमेट्रिक हाजिरी लगा रहा है।नूंह के 901 सरकारी स्कूलों में कार्यरत 5006 अध्यापकों में से मात्र 33 प्रतिशत अध्यापक की हाजिरी लगा रहे हैं। इसी प्रकार पलवल में 606 सरकारी स्कूलों में कार्यरत 3871 स्टाफ में मात्र 59 प्रतिशत ही बायोमेट्रिक हाजिरी लगा रहे हैं। इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। बायोमेट्रिक के अलावा अध्यापक रजिस्टर पर भी हाजिरी लगाते हैं। बायोमेट्रिक हाजिरी का सारा डेटा शिक्षा निदेशालय के पास होता है। हमारे पास कुछ नहीं होता। -डॉ. मनोज मित्तल, उपजिला शिक्षा अधिकारी

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