गुरुजी जनगणना में व्यस्त, शिक्षा व्यवस्था पस्त
फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी बढ़ती जा रही है। जनगणना कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। 378 स्कूलों में केवल 2-3 अध्यापक कार्यरत हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है और दाखिला संख्या में गिरावट आ रही है।

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में पहले से चली आ रही अध्यापकों की कमी अब और गंभीर रूप लेती नजर आ रही है। जनगणना कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने के कारण शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में नियमित पढ़ाई बाधित हो रही है और नए सत्र के प्रवेश उत्सव पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। गुरुजी जनगणना व्यस्त हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पस्त होने लगी है। जन गणना में ड्यूटी में अध्यापकों के लगा जाने के बाद जिले के करीब 378 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल दो से तीन अध्यापक ही कार्यरत हैं।
इतने कम स्टाफ के साथ सभी कक्षाओं को सुचारु रूप से पढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों का सरकारी स्कूलों पर भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है। यही वजह है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दाखिला संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। यदि विद्यालयों में इसी प्रकार अध्यापकों की कमी चलती रही तो अभिभावक बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने से बचेंगे।2700 अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गईशिक्षकों के अनुसार वे जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साथ ड्यूटी पर लगा देना शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है। उनका तर्क है कि जिले में करीब 3700 अध्यापक कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 2700 को जनगणना ड्यूटी में लगा दिया गया है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। स्थिति यह है कि पीजीटी, टीजीटी और पीआरटी सभी श्रेणी के अध्यापकों को जनगणना में लगा दिया गया है। इसके चलते कई स्कूलों में पढ़ाई का जिम्मा हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत अस्थायी शिक्षकों पर आ गया है, जो सीमित संसाधनों और अनुभव के साथ पूरी व्यवस्था संभालने की कोशिश कर रहे हैं।जिला प्रशासन पर उठाए सवालशिक्षकों ने जिला प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अन्य विभागों के कर्मचारियों की तुलना में शिक्षा विभाग पर अधिक भार डाला गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में 111 विभागों से कुल 5200 कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना के लिए लगाई जानी है, जिनमें से अकेले शिक्षा विभाग से ही लगभग 2700 शिक्षकों को शामिल किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि यदि इसी तरह शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता रहा, तो सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की है कि स्कूलों में न्यूनतम आवश्यक स्टाफ सुनिश्चित किया जाए और शिक्षण कार्य को प्राथमिकता दी जाए।सुपरवाइजर की ड्यूटी नहीं लगाए जाने से भी हैं नाराजअध्यापक जनगणना में अपने पद को लेकर भी नाराज है। अध्यापकों का कहना है कि वे बी-ग्रेड श्रेणी में आते हैं। उन्हें बतौर सुपरवाइजर नियुक्त किया जाता रहा है, लेकिन इस बार जनगणनाकार नियुक्त किया है। उन्हें घर-घर जाकर जनगणना करनी होगी, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। इसे हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के पदाधिकारी नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त गौरव अंतिल को ज्ञापन भी दे चुके हैं, लेकिन अध्यापकों की मांग पर संज्ञान नहीं लिया गया है।एक महीने तक स्कूल नहीं जाएंगे स्कूलसरकारी स्कूलों के अध्यापकों की जनगणना में एक महीने के ड्यूटी लगाई गई है। ऐसे में अध्यापक एक महीने तक स्कूल नहीं जाएंगे। इनके नहीं जाने से सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ाने का खतरा मंडरा रहा है।जनगणना के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों के सभी अध्यापकों की ड्यूटी लगाए जाना गलत है। गैर शैक्षणिक कार्य में व्यस्त रखने के बाद अध्यापकों से परिणाम की अपेक्षा की जाती है, जोकि गलत है।इसके अलावा अध्यापक बी-ग्रेड की श्रेणी में आता है और वह सुपरवाइजर के हकदार है, लेकिन उन्हें जनगणनाकार लगाया गया है। यह भी गलत है। इसे लेकर उच्च अधिकारियों से भी मिले, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।-दान सिंह चंदीला, जिला प्रधान, हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन
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