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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कान्त एन्क्लेव का सर्वे शुरू

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कान्त एन्क्लेव का सर्वे शुरू

कांत एन्क्लेव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले के बाद बुधवार को जिला नगर योजनाकार ने मौके पर जाकर सर्वे का काम शुरू कर दिया है। योजनाकार की टीम ने बुधवार को कांत एन्क्लेव में जाकर बंगलो के निर्माणों की जांच शुरू कर दी है। जल्द ही जिला नगर योजनाकार दस्ता सर्वे के आधार पर उन निर्माणों के बारे में रिपोर्ट तैयार करेगी, जो नोटिफिकेशन होने के बाद बनाए गए।सुप्रीम कोर्ट के आए मंगलवार को आदेश के बाद जिला नगर योजनाकार विभाग ने कांत एन्क्लेव का रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इस दौरान बिल्डिंग प्लान से लेकर मकान का निर्माण कार्य पूरा होने पर विभाग की ओर से दिए जाने वाले ओकेपेशन सर्टिफिकेट की जांच शुरू कर दी है। इस दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि किस मकान का नक्शा कब और किसने पास किया?वन संरक्षित भूमि पर नहीं दिया ध्यानपंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 के तहत अरावली में सेक्शन 4 व 5 के तहत नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके तहत अरावली क्षेत्र के गांव कोट, मांगर, लकड़पुर, धौज, सिरोही, खोरी जमालपुर, पाली, गोठड़ा मोहब्बताबाद, सिलाखरी, भांखरी, नौरपुर-धुमसपुर, अनखीर, बड़खल व मेवला महाराजपुर की हजारों एकड़ जमीन को वन संरक्षित भूमि माना गया था। इसके तहत इस जमीन पर किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता था। कांत एन्क्लेव को वर्ष 1985 में हरियाणा सरकार की तरफ से लाइसेंस मिला था। इसके बाद राज्य सरकार ने 11 दिसंबर 1991 को फरीदाबाद का डेवलपमेंट प्लान तैयार किया था। नगर योजनाकार विभाग के सूत्रों के मुताबिक जब भी कोई डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाता है तो उसमें वन विभाग समेत सभी विभागों के अधिकारियों की भागीदारी होती है। बावजूद इसके कांत एन्क्लेव को लाइसेंस मिलने के बाद यहां धड़ल्ले से हुए निर्माण को लेकर किसी ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। यहां मकानों से नक्शा पास होने से लेकर ओकुपेशन सर्टिफिकेशन जारी होने तक किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद यह क्षेत्र विकसित होता रहा। बिजली से लेकर जलापूर्ति समेत सभी जनसुविधाएं यहां मुहैया कराई जाती रहीं। बताया तो यह भी जा रहा है कि कान्त एन्क्लेव के लाइसेंस जारी होने पर वन विभाग को जिला नगर योजनाकार विभाग की ओर से पत्र भेजा गया था, बावजूद किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।--------- वन आरक्षित क्षेत्र की होती रही रजिस्ट्रीयही नहीं इस सबके बावजूद वन आरक्षित क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री होती रही। उस समय न तो वन विभाग की ओर से ही कोई आपत्ति प्रमाण पत्र दर्ज कराया गया और न ही अन्य विभागों की ओर से। अरावली में रजिस्ट्री होने से सरकार अपने खजाने को भरती रही। जिसका खामियाजा आज कांत एन्क्लेव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते नियमों का ख्याल रखा गया होता तो शायद ये दिन नहीं देखने पड़ते-------------पर्यावरण कमेटी ने भी किया था निरीक्षणवर्ष 2007 में पलवल विधायक करन दलाल हरियाणा सरकार में पर्यवरण कमेटी के चेयरमैन थे। विधायक करन दलाल ने बताया कि उनकी अध्यक्षता में कमेटी ने अरावली की वन संरक्षित भूमि पर किए गए निर्माणों को लेकर कांत एन्क्लेव समेत कई निर्माणों का जायजा लिया था। वन संरक्षित भूमि पर इस तरह का निर्माण करना गलता था, जिसकी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को दी गई थी। यही नहीं, इस क्षेत्र में और भी काफी संख्या में निर्माण मिले थे।।------------बिजली निगम बकायेदारों की सूची बनाने में जुटासुप्रीम कोर्ट की ओर से कांत एन्क्लेव को तोड़ने के आए आदेश के बाद बिजली निगम भी अलर्ट हो गया है। अधीक्षण अभियंता पीके चौहान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर ऐसे उपभोक्ताओं का पता लगाए जाने को कहा है, जिन पर बिजली निगम का बिल बकाया है। कार्यकारी अभियंता श्यामबीर सैनी ने बताया कि मथुरा रोड बिजली दफ्तर के एसडीओ सुरेंद्र मेहरा के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है, जो कांत एन्क्लेव में मीटरों की जांच करके उनके बिलों पर नजर रखेंगे। अगर किसी उपभोक्ता ने बिजली का बिल जमा नहीं कराया है तो उसका मीटर काटने के आदेश जारी किए हैं।

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  • Web Title:Survey of Kant Enclave begins after Supreme Court order