Faridabad News: मरम्मत में लापरवाही से गर्मी में चरमराई बिजली व्यवस्था
Faridabad News: फरीदाबाद में गर्मियों की शुरुआत होते ही बिजली संकट गहरा जाता है। ट्रांसफार्मर जलने और फ्यूज उड़ने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। बिजली वितरण निगम ने सर्दियों में लोड का आकलन करने में लापरवाही दिखाई है, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं और उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है।

Faridabad News: फरीदाबाद, केशव भारद्वाज। हर साल गर्मी शुरू होते ही शहर में बिजली संकट गहराने लगता है। कहीं ट्रांसफार्मर जल जाते हैं तो कहीं फ्यूज उड़ने से घंटों बिजली गुल रहती है। सर्दियों के दौरान किए जाने वाले मरम्मत कार्य और लोड आकलन में बरती जाने वाली लापरवाही का खामियाजा गर्मियों में उपभोक्ताओं और उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम एक अक्टूबर से 31 मार्च के बीच अगले वर्ष की संभावित बिजली मांग का आकलन करता है। इसी अवधि में ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की पहचान कर उनके स्थान पर अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाना, जर्जर बिजली लाइनों को हटाकर नई तार बदलना, जंपर और फ्यूज की व्यवस्था मजबूत करना और जरूरत के अनुसार नए फीडर तैयार करना होता है। इसका उद्देश्य गर्मियों में बढ़ने वाले बिजली लोड से पहले ज्यादा क्षमता का आधारभूत ढांचा तैयार करना होता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि कई क्षेत्रों में यह प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। क्षेत्रीय स्तर पर बिजली का वास्तविक लोड सही तरीके से नहीं आंका जाता। कई बार जूनियर इंजीनियर (जेई) पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे नहीं कर पाते और अनुमान के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। परिणामस्वरूप जिन ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए, वे पुराने और ओवरलोड ट्रांसफार्मर गर्मी का मौसम आते ही फुंकने शुरू हो जाते हैं।
बिजली की मांग में वृद्धि
गर्मी बढ़ते ही शहर के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से ट्रांसफार्मर जलने और फ्यूज उड़ने की शिकायतें लगातार सामने आने लगती हैं। रात के समय बिजली की मांग बढ़ने पर कई फीडर ओवरलोड हो जाते हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित होती है। सेक्टरों से लेकर कॉलोनियों और गांवों तक लोग घंटों बिजली कटौती झेलने को मजबूर हो जाते हैं।
ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया
फुंके हुए ट्रांसफार्मर बदलने में भी विभाग को काफी समय लगता है। इससे लोगों का गुस्सा भड़कता है। इस्माइलपुर निवासी निजाम का कहना है कि कई बार नया ट्रांसफार्मर लगाने में कई घंटे लगते हैं। जबकि कुछ मामलों में एक-दो दिन तक लग जाते हैं। इसका कारण उपमंडल कार्यालयों और शिकायत केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होना बताया जाता है। स्टोर से ट्रांसफार्मर मंगाने और उसे लगाने की प्रक्रिया लंबी होने से बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है।
बिजली संकट से परेशान लोग कई बार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी करते हैं। उद्योगों में उत्पादन प्रभावित होता है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को भीषण गर्मी में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। यदि सर्दियों में लोड का वैज्ञानिक आकलन कर समय रहते ट्रांसफार्मर, फीडर और बिजली लाइनों को दुरुस्त किया जाए तो गर्मियों में होने वाली अधिकांश बिजली समस्याओं से बचा जा सकता है।
उद्योगों की समस्या
सरूरपुर इलाके में उद्योग चलाने वाले चंद्रभान कहते हैं कि बिजलीघरों से लेकर गली में लगे ट्रांसफार्मर लोड के अनुसार लगाए जाने चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र का वास्तविक लोड सर्वे कर ओवरलोड ट्रांसफार्मरों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए तो गर्मी में भी निर्बाध आपूर्ति हो सकती है। प्रत्येक उपमंडल स्तर पर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि खराब होने की स्थिति में उन्हें तुरंत बदला जा सके। उनका कहना है कि यदि रखरखाव व्यवस्था और आपूर्ति प्रबंधन में सुधार नहीं किया गया तो हर वर्ष गर्मी के मौसम में बिजली संकट और गहराता जाएगा।
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