सूरजकुंड मेले में झूला गिरने के बाद नवीन पुनिया का कार्यक्रम बीच में रोका

Feb 08, 2026 12:08 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में मेले में हास्य कलाकार अमित टंडन और गायक नवीन पुनिया के कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिए गए। सुरक्षा कारणों से शाम का कार्निवल भी नहीं निकाला गया। अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय लोगों की सुरक्षा के लिए लिया गया है। हालांकि, दुकानदारों और पर्यटकों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है।

सूरजकुंड मेले में झूला गिरने के बाद नवीन पुनिया का कार्यक्रम बीच में रोका

फरीदाबाद। मेले में निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार शाम छह बजे हास्य कलाकार अमित टंडन का महा स्टेज पर कार्यक्रम होना था, जिसे अंतिम समय पर रद्द कर दिया गया। वहीं, प्रसिद्ध गायक नवीन पुनिया का कार्यक्रम शाम पांच से छह बजे के बीच चल रहा था, लेकिन इसे भी बीच में ही रोक दिया गया। मंच से दर्शकों को कार्यक्रम रद्द होने की सूचना दी गई, जिसके बाद धीरे-धीरे भीड़ को नियंत्रित करते हुए कार्यक्रम स्थल खाली कराया गया। इसके अलावा मेले में रोजाना निकाला जाने वाला शाम का कार्निवल भी इस बार नहीं निकाला गया। मेला देखने आए पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय रहता है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे भी रोक दिया गया।

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प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह एहतियातन लिया गया है और इसका उद्देश्य केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सूत्रों के अनुसार, रविवार को झूला परिसर में झूलों के संचालन को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आशंका जताई जा रही है कि रविवार को झूला परिसर में झूले चलाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षा जांच और तकनीकी निरीक्षण के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। प्रशासन की ओर से झूला संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिना अनुमति और जांच के किसी भी झूले का संचालन नहीं किया जाएगा। मेले में मौजूद दुकानदारों और कलाकारों का कहना है कि अचानक कार्यक्रम रद्द होने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है, लेकिन वे भी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन के फैसले के साथ हैं। वहीं, मेला देखने आए पर्यटकों ने भी मिश्रित प्रतिक्रिया दी, कुछ ने निराशा जताई तो कई लोगों ने इसे सही कदम बताया। सुरक्षा पर उठे सवाल मेला परिसर में दो बाद पहले हुए हादसे के बाद भी शनिवार को झूला परिसर में सुरक्षा इंतजाम नाकाफी नजर आए। मौके पर न तो पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद थे और न ही झूलों की तकनीकी जांच से जुड़े कोई दस्तावेज प्रदर्शित किए गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झूले में बार-बार लचक आने के बाद कुछ देर तक झूला चलता रहा, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। प्राथमिक उपचार की सुविधा भी मौके पर पर्याप्त नहीं थी। इससे पहले हुए हादसों के बावजूद सुरक्षा मानकों को लेकर मेला प्रबंधन की गंभीरता सवालों के घेरे में है। वर्ष 2019 में हुए हादसे में बिहार के सीतामढ़ी निवासी विकास झा अचानक झटके से झूले से बाहर लटक गए थे। उनके सिर में गंभीर चोट आई और काफी खून बह रहा था। इसी प्रकार वर्ष 2001 में हुए हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी।

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