टीबी मरीजों की पहचान और निगरानी बेहतर होगी
फरीदाबाद में पिछले वर्ष के दौरान टीबी मामलों में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मरीजों की पहचान और निगरानी के लिए राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक-निजी सहायता एजेंसी का चयन शुरू किया है। बीके अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और सुविधाओं की कमी भी चुनौती बनी हुई है।

फरीदाबाद, धनंजय चौहान। स्मार्ट सिटी में लगातार बढ़ रहे टीबी के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान टीबी मरीजों की संख्या में करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण और मरीजों की बेहतर पहचान और निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक-निजी सहायता एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में जिले में 9410 टीबी मरीजों की पहचान हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 10649 तक पहुंच गई। यानी एक साल में करीब 1239 मरीज बढ़े। वहीं वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में ही 2131 नए मरीज सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो इस वर्ष भी मरीजों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।
टीबी मरीजों की पहचान और निगरानी
अधिकारियों ने बताया कि जिले में बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज कराते हैं। ऐसे में कई मरीज स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में समय पर दर्ज नहीं हो पाते। प्रस्तावित पीपीएसए एजेंसी निजी स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारी स्वास्थ्य विभाग के बीच सेतु का कार्य करेगी। इससे टीबी मरीजों की समय पर पहचान, रिपोर्टिंग, उपचार और फॉलोअप व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही मरीजों को सरकारी योजनाओं और नि:शुल्क दवा सुविधाओं से भी जोड़ा जा सकेगा।
बीके अस्पताल में सुविधाओं की कमी
टीबी नियंत्रण अभियान के सामने स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बीके अस्पताल में टीबी मरीजों के लिए अलग से विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को सामान्य ओपीडी में ही उपचार कराना पड़ता है। इसके अलावा अस्पताल में टीबी मरीजों के लिए अलग वार्ड या भर्ती सुविधा भी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य मरीजों और टीबी संक्रमित मरीजों का एक ही स्थान पर उपचार संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है। ऐसे में अलग ओपीडी और विशेष वार्ड की व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
चिकित्सकों के अनुसार तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी रहना, बलगम या कफ के साथ खून आना, छाती में दर्द, हल्का बुखार, रात में पसीना आना, तेजी से वजन घटना, भूख कम लगना, लगातार कमजोरी महसूस होना और सांस फूलना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
टीबी की रोकथाम के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम है कि हम अधिक लोगों तक पहुंचकर उनमें टीबी की पहचान करने में सफल रहे हैं। निजी साझेदारी से टीबी रोकथाम में मदद मिलेगी।
-डॉ. हरजिंदर सिंह, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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