
डॉक्टरों ने लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया
संक्षेप: फरीदाबाद में हर साल पैंक्रियाटिक कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, जहां हर महीने 50 से 60 नए मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों ने समय पर जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है। धूम्रपान, शराब, और असंतुलित आहार के कारण रोग का खतरा बढ़ता है।
फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। शहर पैंक्रियाटिक कैंसर के मामले में हर साल वृद्धि हो रही है। अस्पतालों में हर माह 50 से 60 नए मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में बढ़ते मामलों को देखते हुए पैंक्रियाटिक कैंसर जागरूकता माह के मौके पर विशेषज्ञों ने लाेगों को जागरुक होकर समय पर जांच कराने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। स्मार्ट सिटी में ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज एवं अस्पताल, बीके सहित 15 बड़े निजी अस्पताल है। प्रत्येक अस्पताल में हर महीने छह से आठ नए पैंक्रियाटिक कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

पिछले साल यह संख्या चार से पांच था। वहीं दूसरी तरफ नवंबर माह को विश्वभर में पैंक्रियाटिक कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसके तहत शुक्रवार रात एक निजी अस्पताल की ओर से नीलम बाटा रोड स्थित होटल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लोगों को बीमारी के बढ़ते मामलों, लक्षणों और रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी दी। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट विभाग के चेयरमैन डॉ. रामचंद्र सोनी ने बताया कि पैंक्रियाटिक कैंसर यानी अग्न्याशय का कैंसर, शरीर के सबसे घातक कैंसरों में से एक है। शहर में हर महीने अस्पताल में छह से आठ नए मरीज इलाज के लिए पहुंचते है। यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण असंतुलित जीवनशैली और देर से बीमारी का पता चलना है। उन्होंने कहा कि बीमारी शुरुआती लक्षण सामान्य पेट की बीमारी जैसे लगते हैं, जिससे मरीज अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार पेट दर्द रहना, अचानक वजन घटना, भूख न लगना, पीलिया, थकान और त्वचा या आंखों का पीला पड़ना प्रमुख संकेत हैं। उन्होंने बताया कि धूम्रपान, अत्यधिक शराब सेवन, मोटापा और पारिवारिक हिस्ट्री बीमारी के जोखिम को और बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। मरीज फिर से स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्त जांच और सीटी स्कैन जैसी जांचें कराना बहुत जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली से बचाव संभव डॉक्टर ने कहा कि लाेग अपनी दिनचर्या में सुधार करें। फाइबरयुक्त आहार लें, जंक फूड और प्रसंस्कृत भोजन से परहेज करें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाए रखें। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज बिलकुल नजरअंदाज न करें।

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