सेवानिवृत प्रधानाचार्य प्लास्टिक की बोतलों से गमले बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहीं

हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद की रेनू चुघ ने बेकार प्लास्टिक की बोतलों और अन्य सामान का पुन: उपयोग करके अपनी छत को हरियाली से भर दिया है। उन्होंने स्कूलों में भी बागवानी का कार्य किया है। उनका यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है।

सेवानिवृत प्रधानाचार्य प्लास्टिक की बोतलों से गमले बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहीं

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज के सामने बड़ी मिसाल पेश करते हैं। ऐसी ही एक मिसाल सरकारी स्कूल से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत रेनू चुघ हैं। उन्होंने बेकार समझी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलों, पीवीसी पैनल, पुराने तार, कुल्हड़ और अन्य सामान का पुन: उपयोग कर अपनी छत को हरियाली से भर दिया है। उनका यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है, बल्कि लोगों को वेस्ट मैनेजमेंट के प्रति भी जागरूक कर रहा है। वह गांव साहूपुरा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से वर्ष 2022 में सेवानिवृत हुई थी। रेनू चुघ को बचपन से ही पौधे लगाने और गार्डनिंग का शौक रहा है। सेवानिवृति के बाद उन्होंने अपने इस शौक को और आगे बढ़ाया और घर की छत को एक खूबसूरत गार्डन में बदल दिया। उन्होंने खराब प्लास्टिक की बोतलों को फेंकने की बजाय उन्हें नया रूप देने का फैसला किया। बता दें कि रेनू चुघ सेक्टर तीन में अपने परिवार के साथ रहती हैं。

स्कूलों में भी विकसित किए बगीचे

स्कूल सेवा से जुड़ी रहने के दौरान भी उनका प्रकृति से लगाव बना रहा। चंदावली, सिही और बल्लभगढ़ के सरकारी स्कूल में नियुक्ति के दौरान परिसर में बगीचा विकसित किया और हरियाली को बढ़ाने में अपना योगदान दिया। इन स्कूलों की हरियाली आज भी देखने योग्य है। बता दें कि रेनू इंग्लिश की अध्यापक रही हैं।

बोतलों पर उकेरती हैं रंगीन डिजाइन

रेनू पहले इन बोतलों पर अलग-अलग तरह की डिजाइन बनाती हैं और उनमें आकर्षक रंग भरती हैं। इसके बाद इन्हीं बोतलों में स्नेक प्लांट, जेड प्लांट, मनी प्लांट, पुदीना, धनिया सहित कई तरह के पौधे लगाती हैं। देखने में ये गमले बेहद खूबसूरत लगते हैं और यह संदेश देते हैं कि बेकार वस्तुओं का सही इस्तेमाल कर उन्हें उपयोगी बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह की रचनात्मक गार्डनिंग इंटरनेट मीडिया के माध्यम से सीखी। इसके अलावा वह पुराने मटकों, हैंगर और अन्य सामान से आकर्षक फव्वारे भी तैयार करती हैं, जो उनकी छत की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

पति हैं सिविल इंजीनियर

रेनू के परिवार में भी प्रकृति के प्रति यही लगाव देखने को मिलता है। इनके पति आयुष चुघ आगरा में सिविल इंजीनियर हैं। उनके बड़े बेटे आयुष कंप्यूटर इंजीनियर हैं, जबकि छोटे बेटे रक्षित अपना कार्य करते हैं। इनकी बहू हेमलता को भी गार्डनिंग का काफी शौक है। उन्होंने भी खराब प्लास्टिक बोतलों का पुन: प्रयोग कर अपनी छत पर हरियाली विकसित की हुई है। इनका कहना है कि अगर हर व्यक्ति अपने घर में छोटी-सी पहल करे और बेकार वस्तुओं को दोबारा उपयोग में लाए तो पर्यावरण को काफी लाभ पहुंच सकता है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि इच्छाशक्ति हो तो कबाड़ को भी खूबसूरती और उपयोगिता में बदला जा सकता है।

सामान्य प्रश्न

रेनू चुघ ने अपनी छत पर क्या विकसित किया है?
रेनू चुघ ने अपनी छत पर हरियाली से भरा एक खूबसूरत गार्डन विकसित किया है।
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