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मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने अरावली में फार्महाउस के रिकॉर्ड खंगाले

अरावली पर्वत श्रंखलाओं के बीच उच्चतम न्यायालय और सरकारों के आदेशों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध निर्माणों पर अब मुख्यमंत्री मनोहरलाल की नजर टिक गई हैं। मुख्यमंत्री के आदेश पर मुख्यमंत्री के उड़नदस्ते ने अरावली का रिकॉर्ड सोमवार को अपने कब्जे में ले लिया। दरअसल, अरावली में निर्माण के लिए नगर निगम प्रशासन द्वारा दिए गए सीएलयू पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने सोमवार को यह कार्रवाई की। मुख्यमंत्री इस मामले की जांच अपने स्तर पर कराएंगे।

मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के उपाधीक्षक दिनेश यादव के नेतृत्व में एक टीम सोमवार को निगम के योजनाकार कार्यालय पहुंची और वरिष्ठ शहरी योजनाकार सतीश पाराशर से कई घंटे पूछताछ की और अरावली संबंधित दस्तावेज कब्जे में ले लिए। साथ ही कुछ और संबंधित कागजात टीम को मंगलवार को भी सौंपे जाएंगे। आरोप है कि अरावली में नियमों को ताक पर रखकर सीएलयू दिए गए। ऐसे करीब छह सीएलयू की जांच के आदेश मुख्यमंत्री ने उड़नदस्ते को भेजे हैं, जिसकी जांच के लिए उड़नदस्ते ने कार्रवाई शुरू की। जबकि योजनाकार कार्यालय अभी तक यथास्थिति रिपोर्ट बनाने में जुटा था।

पांच दिन पहले दिए थे मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री मनोहरलाल पांच दिन पहले यहां एक समारोह में शामिल होने आए थे तभी उन्होंने कहा था कि अरावली पर्वत श्रंखलाएं उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें किसी भी प्रकार की अनदेखी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जबकि उन्होंने मांगर बनी का कुछ रकबा बढ़ाने की बात भी कही थी।

करीब छह सीएलयू दिए जाने का आरोप

नगर निगम पर करीब छह सीएलयू दिए जाने का अरोप है। उपमहापौर मनमोहन गर्ग बताते हैं कि निगम के अधिकारी इस संबंध में सूचनाएं छिपाते हैं। एक सूचना में अधिकारियों ने बताया कि अनखीर गांव की सारी जमीन नगर निगम की है। जब निगम की जमीन है तो फिर सीएलयू किसे और क्यों दिए गए? इसमें पूर्व के अधिकारियों ने भी नियमों को ताक पर रखकर निर्माणों की अनुमति दी हैं। इसलिए इसकी विजिलेंस जांच भी जरूरी है।

अरावली में छह सौ हेक्टेयर जमीन पर बने अवैध निर्माण

अरावली में करीब छह सौ हेक्टेयर रकबे में अवैध रूप से फार्म हाउस और बैंक्वेट हाल आदि बने हैं। जबकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अरावली की वर्गीकृत की गई संबंधित जमीन वन आरक्षित घोषित की जा चुकी है। वन विभाग के रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद यह तथ्य सामने आए हैं। अलग बात है इनमें कई स्थलों को लेकर जमीन के मालिक और नगर निगम के बीच अदालत में मामला विचाराधीन है। सूत्रों के मुताबिक मौके पर कमोबेश सभी जमीन पर लोगों का कब्जा है। इनमें अधिकांश ने निगम से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली और न ही सरकार से कृषि योग्य भूमि का उपयोग किसी अन्य कार्य में करवाने की खातिर बदलावा करवाया।

सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली में खुदाई करने तक पर लगाई रोक

सर्वोच्च न्यायालय ने छह मई 2002 में अरावली पहाड़ी को वन आरक्षित क्षेत्र घोषित किया। इससे खनन जैसी हर प्रकार की खुदाई पर रोक लगाई गई। अरावली में निर्माण कार्य करने के लिए संबंधित व्यक्ति को वन विभाग से एनओसी लेनी अनिवार्य कर दी। बावजूद इसके निर्माण कार्य नहीं रुका। सरकार, शासन में रसूख रखने वाले के उच्चतम न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करते हुए धड़ल्ले से निर्माण कर रहे हैं।

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दिनेश यादव उपाधीक्षक, मुख्यमंत्री उड़नदस्ता:

हमारे पास अरावली में सीएलयू दिए जाने की शिकायत आई थी, जिसकी जांच के लिए सोमवार को नगर निगम के योजनाकार कार्यालय से कुछ संबंधित दस्तावेज लिए हैं कुछ मंगलवार को अधिकारी उन्हें देंगे। करीब छह मामलों में निर्माण की अनुमति नगर निगम ने दी है। इसकी जांच करके मुख्यमंत्री को रिपोर्ट देंगे।

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  • Web Title: Records of farmhouse