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फरीदाबाद

रानी की छतरी दिसंबर तक होगी तैयार

हिन्दुस्तान टीम,फरीदाबादPublished By: Newswrap
Tue, 21 Sep 2021 11:50 PM
रानी की छतरी दिसंबर तक होगी तैयार

बल्लभगढ़। रानी की छतरी और शाही तालाब के जीर्णोद्धार का काम अब तेजी पकड़ चुका है। जीर्णोद्धार करने वाली कंपनी का दावा है कि दिसंबर तक छतरी व शाही तालाब का काम पूरा हो जाएगा।इधर, नगर निगम अधिकारी भी दावा कर रहे कि छतरी के आसपास के अवैध निर्माण भी हटा दिए जाएंगे।

करीब पोने दो करोड की लागत से रानी की छतरी व शाही तालाब का जीर्णोद्धार अगस्त 2019 में शुरू हुआ। जिसका काम गुरुग्राम की जे.के.कंट्रेक्टर को दिया गया था। काम अगस्त 2020 में पूरा होना था, लेकिन कोरोना के चलते व कंपनी को समय पर भुगतान नहीं होने के चलते काम पूरा होने में देरी हुई। मौजूदा समय में शाही तालाब व रानी की छतरी को दौसा राजस्थान के कारीगर आखिरी टच देने में लगे हुए हैं। इसी कारण कंपनी का दावा है कि दिसंबर तक अवश्य ही रानी की छतरी व शाही तालाब को नया रूप देकर शहरवासियों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।

शाही तालाब सहित हुए कई काम पूरे

शाही तालाब में राजस्थान का लाल पत्थर कारीगरों द्वारा लगाया गया है। तालाब में जाने वाली सीढियों पर भी तीनों ओर प़त्थर लगाकर पुराना लुक दिया गया है। इसी प्रकार तालाब में पानी निकासी के लिए अलग से एक मोटर लगाई गई है। इसके अलावा तालाब में सुरक्षा की दृष्टि से स्टील की फैंसी ग्रील लगाई गई है। साथ ही साथ छतरी के तीन मुख्य स्थानों पर हाईमॉस्क लाइट भी लगाई गई है। रात्रि में लाइट के जलते ही पूरा क्षेत्र बेहद सुदंर लगने लगता है।

छतरी को आखिरी टच देना बकाया

जीर्णोद्धार करने वाली कंपनी के जगदीश कुमार ने बताया कि अब छतरी को आखिरी टच देना बकाया है। जिसका काम जोरशोर से चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर तक छतरी व शाही तालाब को प्रशासन के सुपुर्द कर दिया जाएगा।

परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा : दिसंबर तक रानी की छतरी व शाही तालाब जनता के सुपुर्द कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित कार्य को अवश्य ही दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि रानी की छतरी के आसपास होने वाले अवैध कब्जों को भी जल्द ही साफ कर दिया जाएगा।

रानी की छतरी व शाही तालाब की गाथा पर एक नजर

बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह 1857 की क्रांति के अग्रणी पंक्ति के योद्धा थे। उनका महल आज भी उनकी वीर गाथा बताता है। उनकी रानी बने शाही तालाब में स्नान करने के बाद छतरी के ऊपर पूजा किया करती थी। राजा नाहर सिंह को अंग्रेजों ने उन्हें 9 जनवरी 1858 को दिल्ली के लाल कुआं चौक पर फांसी पर लटकाया था।

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