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रामचरित मानस पूरी भारतीय जीवन पद्धति: राज्यपाल

रामचरित मानस पूरी भारतीय जीवन पद्धति: राज्यपाल

हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि रामचरित मानस पूरी भारतीय जीवन पद्धति है। मोरारी बापू रामचरित मानस को सभी के दिलों में उतार रहे हैं। जिस प्रकार लोग बापू की कथा सुनते हैं उसी प्रकार भारतीय समाज की एकता भी सुदृढ़ हो जाए तो समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

राज्यपाल बुधवार को सेक्टर-12 में बनाए गए ओपी भल्ला चित्रकूटधाम में चल रही मोरारी बापू की श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा सुनने पहुंचे। उन्होंने कहा कि मोरारी बापू कथा के माध्यम से भारत नहीं पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार कर रहे हैं। मोरारी बापू को देखकर उन्हें स्वमी रामतीर्थ याद आते हैं। एक बार उनके इंग्लैंड में वहां की वेशभूषा को पहनने का आग्रह किया गया। उन्होंने सब कुछ पहना लेकिन हैट नहीं पहना, क्योंकि सिर पर भारत का गौरव और पहचान लिए हुए थे। उन्होंने कहा कि मानव रचना विश्वविद्यालय अपने नाम की तरह वास्तविकता में मानव की रचना कर रहा है। लोकमान्य तिलक, स्वामी विवेकानंद को याद करो, जिनके मुख पर वंदेमातरम और हाथ में गीता होती थी। मोरारी बापू ने कहा कि राजपीठ द्वारा व्यासपीठ के सम्मान के लिए उनका आभार है।

...तुझमे रब दिखता है, यारा मैं क्या करू

बापू ने ईश्वर के प्रति अगाढ़ प्रेम को दर्शाते हुए कहा कि तुझमे भी रब दिखता है, यारा मैं क्या करुं कहा तो पंडाल में इस गाने की लाइनें गंूंज उठी। संगीतज्ञों ने इस गाने की धुन ऐसी बजाई कि लोग काफी देर तक झूमते रहे। बापू ने पनघटवृत्ति के बारे में बताते हुए कहा कि सत्युग का सार पनघट वो है, जहां पानी पूरी मात्रा में है और वो प्यासों की प्यास बुझाता है। सत्युग में सबको प्यास थी और प्यास को बुझाने की व्यवस्था थी।

सतयुग पवित्र तो द्वापर युग विचित्र है

व्यासपीठ से कथा करते हुए मोरारी बापू ने कथा प्रसंग के दौरान कहा कि सतयुग पवित्र युग रहा। त्रेता युग चरित्र युग है। उस युग में चरित्रहीनता के लिए युद्ध हुआ। राम सीता हनुमान जी चरित्रवान है। उनके चरित्र का अनुसरण सौभाग्य की बात है। द्वापर युग विचित्र है। अहिंसाल काल में महाभारत हुआ। भगवान कृष्ण उपवासी हैं तो 56 भोग भी स्वीकार करते हैं। ब्रह्मचारी भी हैं तो 16 हजार रानियां है। युद्ध भी करते हैं तो द्वारिका में छुप जाते हैं। विचित्र युग है। लेकिन कलयुग अतिविचित्र युग है।

भावुक हुए श्रद्धालुगण

कथा के पांचवें दिन बापू ने श्री कृष्ण की मृत्यु का अनोखा प्रसंग प्रस्तुत किया। इस दौरान बापू भावुक हो गए और उनकी आंखे भी पानी से भर गई। साथ श्रद्धलुगण भी भावुक हो गए। बापू ने कहा जिसमें अत्यंत क्रोध की भावना है उसमें अत्यंत करुणा की संभावना है। मन की महाभारत के वर्णन में उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण से सरल चित्त विश्व में किसी का नहीं हुआ। कभी किसी संत को देखो तो ये मान लेना थोड़ी देर के लिए श्री कृष्ण को देख लिया।

स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था

कथा की सभी व्यवस्थाएं विभिन्न संस्थाओं के स्वयंसेवकों ने संभाल रखी है। इसमें महिलाओं की भागीदारी अधिक है। मानव रचना शैक्षणिक संस्थान द्वारा आयोजित कथा सुनने के बाद संस्थान की ओर से भोजन की व्यवस्था में सैंकड़ों लोग श्रद्धापूर्वक भोजन ग्रहण करते हें। इसमें पेयजल और यातायात की व्यवस्था में स्वयंसेवक जुटे हैं।

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