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फरीदाबाद

प्लाटिंग कर खोरी गांव बसाने वालों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी

हिन्दुस्तान टीम,फरीदाबादPublished By: Newswrap
Wed, 16 Jun 2021 11:40 PM
प्लाटिंग कर खोरी गांव बसाने वालों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी

फरीदाबाद। अरावली में प्लॉटिंग करके खोरी को बसाने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। इसके लिए प्रशासन के कानूनी सलाहकार मौके पर जाकर खोरी में बसे लोगों से प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ लिखित शिकायत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी है। सलाहकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत मांगी है। लोग चाहे तो वे गुप्त शिकायत भी पुलिस आयुक्त या नगर निगम आयुक्त कार्यालय को भेज सकते हैं। दूसरी ओर नगर निगम में इससे संबंधित पुरानी फाइलों को खंगाला जा रहा है। ताकि बीते वर्षो में पुलिस को भेजी गई शिकायतों पर कार्रवाई की जा सके।

वर्ष 2019 में नगर निगम ने पुलिस को भेजी थी शिकायत

नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2018 और 2019 में खोरी या आसपास के इलाके में भूखंड बेचने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की? थी। इसमें कुछ अज्ञात और कुछ की? पहचान भी बताई गई थी। अब ऐसी फाइलों को खंगाला जा रहा है। ताकि पुलिस प्रशासन से पूछा जा सके कि आखिर नगर निगम की? शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की? सूत्रों के मुताबिक नगर निगम करीब दस ऐसे लोगों के खिलाफ बीते वर्षों में पुलिस में शिकायत दे चुका है। नगर निगम अब एक बार फिर ऐसे आरोपियों के खिलाफ दी गई रिपोर्ट को तैयार करने में जुटा है। ताकि कार्रवाई करवाई जा सके।

दिल्ली से पॉवर ऑफ अटॉर्नी करवाकर बेच दी जमीन

खोरी के लोगों के पास जमीन के कागजात है। कुछ लोगों के पास दिल्ली से कराई गई पॉवर ऑफ अटॉर्नी के कागज हैं। खोरी के लोग बताते हैं कि जमीन भले ही हरियाणा की सीमा में खरीदी है, लेकिन कागज दिल्ली में पॉवर ऑफ अटॉर्नी करवाकर दिए? गए। कुछ लोगों को पावर ऑफ अटॉर्नी करवाने का भरोसा दिया गया है। जबकि कुछ लोगों के पास मात्र स्टांप पेपर पर जमीन बेची और खरीदी गई हैं। कुछ ने पावर ऑफ अटार्नी भी फर्जी होने के आरोप लगाए हैं। इसके बावजूद लोग यह बताने को तैयार नहीं है? कि आखिर जमीन उन्होंने किससे खरीदी है? अब इसे भूूमाफिया का खौफ कहें या फिर इन्हें वाकई पता नहीं है? कि जमीन किससे खरीदी और किसे पैसे दिए?

टास्क फोर्स ने नहीं की कार्रवाई

राज्य सरकार के निर्देश पर कुछ वर्षों पहले एक टास्क फोर्स का भी गठन किया गया था, जिसमें वन विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन, पुलिस प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी शामिल किए गए थे। लेकिन इस टास्क फोर्स ने अरावली बचाने के लिए कोई काम नहीं किया और खोरी समेत अरावली में अवैध कब्जों और अवैध निर्माण खेल बखूबी चलता गया। खोरी मामले को लेकर अब चहुंओर एक ही सवाल लोग करते हैं। खोरी बसने के जिम्मेवार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब कार्रवाई होगी? सवाल नगर निगम पर भी है कि जब अरावली में मकान बनाए जा रहे थे, तब नगर निगम के भवन निरीक्षक कहां थे? देखने में आता है कि शहर में अगर कोई अपने मकान की मरम्मत भी करता है तो भवन निरीक्षक आ धमकते हैं।

प्रशासन बदल रहा अपनी कार्ययोजना की रणनीति

प्रशासन खोरी गांव में अवैध निर्माण को हटाने को लेकर बार-बार अपनी कार्ययोजना की रणनीति बदल रहा है। ताकि किसी प्रकार के टकराव से बचा जा सके। हालांकि प्रशासन यह तय कर चुका है कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है, जिस पर अमल करते हुए यह जगह खाली करवानी है। इसके लिए प्रशासन के पास पर्याप्त समय छह सप्ताह (करीब 17 जुलाई) तक का समय है। इस दौरान लोगों से स्वत: ही जगह खाली करवाई जाएगी। लोग स्वत: मकान खाली करेंगे तो कार्रवाई में आसानी होगी।

छह सप्ताह बाद नगर निगम की रिपोर्ट की मौके पर जांच करेगी न्यायालय की टीम

नगर निगम के कानूनी सलाहकार सतीश बताते हैं कि छह सप्ताह बाद जो सर्वोच्च न्यायालय में नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत होगी। न्यायालय की एक टीम मौके पर आकर उस रिपोर्ट की जांच करेगी। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षरश: पालन किया जाएगा। कानूनी सलाहकार सतीश बताते हैं कि जिन लोगों ने यहां प्लॉटिंग की है, ऐसे लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत खोरी के लोगों से मांगी गई है, लेकिन किसी ने अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी है। लोग चाहें तो ऐसी लिखित शिकायत पुलिस आयुक्त, नगर निगम आयुक्त, मंडलायुक्त या फिर पुलिस महानिदेशक को भेज सकते हैं।

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