महिला आरक्षण बिल गिरने पर गरमाई सियासत
फरीदाबाद/नूंह में कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद ने भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण विधेयक को पारित न कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के हित में नहीं, बल्कि राजनीतिक परिसीमन के लिए था। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने मांग की है कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए।

फरीदाबाद/नूंह, धनंजय चौहान। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नूंह से कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं को आरक्षण देने के बजाय देश के संघीय ढांचे में बदलाव का षड्यंत्र था। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में आफताब अहमद ने कहा कि केंद्र सरकार की महिला विरोधी नीयत उजागर हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में राजनीतिक परिसीमन (डीलिमिटेशन) करना चाहती थी, ताकि अपने हिसाब से सीटों का पुनर्गठन कर सके।
यह पूरा प्रयास एक चुनावी प्रोपेगेंडा था, जिसे विपक्ष ने विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि महिला आरक्षण को बिना देरी 543 लोकसभा सीटों पर लागू किया जाए। सरकार अगर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे प्रावधानों वाला बिल लाती है तो विपक्ष उसका समर्थन करेगा। आफताब ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदाताओं को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।विधायक ने कहा कि यह विधेयक वास्तव में महिलाओं के हितों से ज्यादा परिसीमन से जुड़ा था, जिसमें सरकार जातिगत जनगणना के आंकड़ों को दरकिनार कर मनमानी करना चाहती थी। ऐसे में विपक्ष के पास इसका विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। आफताब अहमद ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र, संविधान और विपक्षी एकजुटता की जीत बताते हुए कहा कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो सरकार को झुकना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण में एससी-एसटी की तरह ओबीसी वर्ग को भी उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए।--
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