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शहीदों के परिवारों की मदद के लिए आगे आए लोग

फरीदाबाद। वरिष्ठ संवाददाता पुलवामा में हुए हमले को लेकर जिले के लोग सिर्फ कैंडल मार्च निकालने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि शहीदों के परिजनों के लिए मदद के लिए भी आगे आ रहे हैं। किसान, वकील, शिक्षक और नौकरीपेशा लोग शहीदों के परिजनों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। लोग अपने साथियों से भी शहीदों के परिजनों के लिए मदद करने की अपील कर रहे हैं। किसान संघर्ष समिति, नहरपार ने मुआवजे को लेकर रविवार को बड़ौली गांव में पंचायत आयोजित की थी। मगर, यह पंचायत श्रद्धांजलि सभा में बदल गई। किसानों ने मुआवजे की मांग छोड़कर शहीदों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख 51 हजार रुपये देने का निर्णय लिया। समिति के संयोजक सतपाल नरवत ने बताया कि इसमें से एक लाख रुपये पंचायत के दौरान ही इकट्ठे हो गए थे। जबकि बाकी 51 हजार रुपये भी एक-दो दिन में इकट्ठे कर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिले के किसान शहीदों के परिवारों के साथ खड़े हैं। शहीदों के परिजनों की हरसंभव मदद की जाएगी। राजकीय नेहरू कॉलेज से सेवानिवृत प्रोफेसर सेक्टर-नौ निवासी डॉ. आलोकदीप ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों में से एक के बच्चे की शिक्षा का भार उठाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उनके जीवन काल के समाप्त होने के बाद उनकी बड़ी बेटी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभमदीप और छोटी बेटी अजेयादीप बच्चे की शिक्षा का भार उठाएंगी। पैरों पर खड़ा होने तक शहीद के बच्चे की मदद की जाएगी। बल्लभगढ़ की भाटिया कॉलोनी निवासी अनुज चौधरी गुरुग्राम स्थित यूनिटेक कंपनी में एक्जीक्यूटिव हैं। उन्होंने शहीदों के परिजनों की मदद के लिए पेटीएम के जरिए दो हजार रुपये की सहायता राशि भेजी है। उन्होंने बाकी लोगों से भी शहीदों के परिजनों को सहायता राशि भेजने का अनुरोध किया है। इसके लिए वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील कर रहे हैं। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता एलएन पाराशर ने पुलवामा के शहीदों के परिजनों के लिए अपनी एक माह की कमाई प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की है। उन्होंने अपने साथी वकीलों से भी पुलवामा के शहीदों की मदद करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए। पूरा देश सेना और सरकार के साथ खड़ा है।

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  • Web Title:People who came forward to help the families of martyrs