पलवल-नूंह चार लेन मार्ग के निर्माण की अड़चन दूर

Newswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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नूंह, सरसमल। पलवल और नूंह के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे

पलवल-नूंह चार लेन मार्ग के निर्माण की अड़चन दूर

नूंह, सरसमल। पलवल और नूंह के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से अटकी पलवल-नूंह चार लेन सड़क परियोजना अब गति पकड़ने जा रही है। निर्माण में बाधा बने पेड़ों की कटाई के बदले बड़े स्तर पर पौधरोपण की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकार ने जमीन खरीदने के लिए बजट को मंजूरी दे दी है, जिससे इस महत्वपूर्ण परियोजना की राह साफ हो गई है।

परियोजना में रुकावट

दरअसल, इस परियोजना में सबसे बड़ी रुकावट पौधरोपण के लिए जमीन की कमी थी, जिसे अब दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। वन विभाग ने नूंह जिले में करीब 66 एकड़ जमीन की पहचान कर ली है, जहां बड़े स्तर पर पौधे लगाए जाएंगे। इस जमीन को खरीदने के लिए सरकार ने लगभग 25 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। राजस्व विभाग के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। जमीन उपलब्ध होते ही पौधरोपण का काम तेजी से शुरू होगा, जिससे सड़क निर्माण की राह में आ रही प्रशासनिक अड़चनें खत्म हो जाएंगी। अधिकारियों का मानना है कि यह निर्णय परियोजना को समय पर पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और वर्षों से लंबित काम अब जमीन पर उतरता नजर आएगा।

पेड़ों की कटाई और पौधरोपण

सूत्रों के मुताबिक चार लेन सड़क निर्माण के लिए हजारों पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वन विभाग के नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। प्रत्येक पेड़ के बदले दस नए पौधे लगाने का प्रावधान है, जिसके तहत लाखों पौधे रोपे जाएंगे। यह पौधरोपण केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि इसके लिए उपयुक्त स्थान, सिंचाई व्यवस्था और देखरेख की योजना भी तैयार की जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन बना रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र हरियाली से भरा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया तो यह क्षेत्र के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट बन सकता है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते नजर आएंगे।

137 करोड़ की परियोजना, लंबे समय से थी मांग

पलवल-नूंह मार्ग को चार लेन में बदलने की मांग पिछले कई वर्षों से उठ रही थी। फिलहाल यह सड़क दो लेन की है, जिस पर लगातार बढ़ते वाहनों का दबाव दुर्घटनाओं और जाम का कारण बन रहा है। करीब 137 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन जमीन और पौधरोपण की समस्या के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा था। इससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा था। हाल ही में पलवल के मंडकोला गांव के ग्रामीणों ने पैदल मार्च कर प्रशासन पर दबाव बनाया था। अब सरकार के ताजा फैसले के बाद लोगों को उम्मीद जगी है कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा और उन्हें बेहतर सड़क सुविधा मिल सकेगी।

औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा सीधा फायदा

इस चार लेन सड़क का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र के औद्योगिक विकास को मिलेगा। नूंह, धारुहेड़ा, भिवाड़ी और पृथला जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र इस मार्ग के जरिए एक-दूसरे के और करीब आ जाएंगे। इससे माल ढुलाई में समय और लागत दोनों की बचत होगी। वर्तमान में वाहनों को कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के जरिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे टोल और ईंधन का खर्च बढ़ जाता है। नए मार्ग के बनने से यह दूरी कम होगी और उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, केएमपी पर वाहनों का दबाव भी घटेगा, जिससे यातायात व्यवस्था और सुगम होगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली साबित हो सकती है।

किस गांव में कितनी जमीन खरीदी जाएगी

गांव आंकेडा-09 एकड़ जमीन

गांव कोटला-06 एकड़ जमीन

गांव मोहमदपुर-51 एकड़ जमीन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पलवल-नूंह सड़क परियोजना का बजट कितना है?
सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।
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