Faridabad News: बीके अस्पताल में ऑक्सीजन की पाइपलाइन बिछाने की तैयारी
Faridabad News: फरीदाबाद के बीके अस्पताल में ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाई जाएगी। यह योजना 4.19 लाख रुपए में तैयार की गई है और तीन महीने में पूरी होने का लक्ष्य है। इससे मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में सुविधा होगी। निर्माण एजेंसी का चयन भी हो गया है।

Faridabad News: फरीदाबाद, सरसमल। बीके अस्पताल में ऑक्सीजन की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए योजना तैयार की गई है। इस काम पर 4.19 लाख रुपए खर्च होंगे और इसे शुरू होने के बाद तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे मरीजों के बिस्तर तक ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर होगी और इलाज के दौरान कर्मचारियों को भी सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने निर्माण एजेंसी का चयन करने के लिए निविदा लगा दी है। बीके अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत वार्डों में बिस्तरों के पास ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए मरीजों के पास ऑक्सीजन के लिए निकास बिंदु बनाए जाएंगे। इससे जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन देने के लिए सिलेंडर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की जरूरत कम होगी। गंभीर मरीजों के उपचार में इससे कर्मचारियों को समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। व्यवस्था में दबाव की निगरानी और जरूरत के अनुसार किसी हिस्से की आपूर्ति बंद करने की सुविधा भी होगी। इससे मरम्मत के समय पूरे वार्ड की व्यवस्था प्रभावित होने से बचाई जा सकेगी。
ऑक्सीजन पाइपलाइन के विशेष पट्टे
ऑक्सीजन की पाइपलाइन के साथ बिस्तर के पीछे लगाए जाने वाले विशेष पट्टे भी लगाए जाएंगे। इनमें चिकित्सा गैस के लिए स्थान के अलावा बिजली के सॉकेट होंगे। नर्स को बुलाने के लिए बटन लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। प्रत्येक पट्टे की लंबाई करीब डेढ़ मीटर होगी। इसमें दो 5/15 एम्पियर और दो 5 एम्पियर के बिजली सॉकेट तथा चार बोतल रखने की जगह वाला डंडा दिया जाएगा। इससे मरीज के पास उपचार में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।
आपातकाल और गंभीर मरीजों को राहत
बीके अस्पताल में करीब 200 बेड हैं। यहां रोजाना औसतन 2 हजार मरीज बाह्य रोगी विभाग में उपचार के लिए पहुंचते हैं। आपातकालीन विभाग में रोजाना औसतन 250 मरीज आते हैं। अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में 8 बेड हैं, जबकि रोजाना औसतन 25 ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में बिस्तर के पास ऑक्सीजन और बिजली की सुविधा मिलने से गंभीर मरीजों के उपचार में काम आसान होगा। नर्स को बुलाने की व्यवस्था से मरीज अपनी जरूरत की सूचना भी आसानी से दे सकेगा।
तीन महीने में पूरा होगा काम
परियोजना पर 4.19 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। काम शुरू होने के बाद इसे तीन महीने में पूरा किया जाना है। इसमें केंद्रीय ऑक्सीजन पाइपलाइन के साथ बिस्तर के पीछे लगाए जाने वाले पट्टों से जुड़े बिजली और अन्य जरूरी काम शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। बिस्तर के पास ही ऑक्सीजन और बिजली की सुविधा होने से उपचार के दौरान जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल भी आसान होगा।


