On the night of Shab-e-Barat spent the last days praying for God - शब-ए-बरात की रात खुदा की इबादत कर गुजारी DA Image

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शब-ए-बरात की रात खुदा की इबादत कर गुजारी

मुस्लिम समाज की चार मुकद्स रातों में से एक शब-ए-बरात की रात मुस्लिम श्रद्धालुओं ने इबादत करते हुए गुजारी। मुस्लिम समाज ने शब-ए-बारात मनाया। जिले की सभी मस्जिदों में मंगलवार की रात में नमाज अदा करने के विशेष इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं ने पूरी रात खुदा की इबादत करते हुए गुजारी। इस दौरान पुलिस ने सभी मस्जिदों के आस-पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। मंगलवार शाम को सूर्यास्त के समय होने वाली मगरीब की नमाज के लिए विशेष इंतजाम किए गए।

मौलाना जमालुद्दीन बताते हैं कि शब-ए-बरात की रात में की गई इबादत से अल्लाह गुनाहों को माफ करते हैं। दरअसल, शब-ए-बरात की रात पूरे साल का हिसाब की रात है और अगले साल के काम तय किए जाते हैं, अल्लाह तय करेंगे कौन पैदा होगा? कौन मरेगा? किसे कितनी रोजी मिलेगी? इसी के चलते अपने गुनाहों की माफी मांग कर आगे की जिंदगी अच्छी गुजारने का मौका अल्लाह देते हैं।

मस्जिद, कब्रिस्तान और दरगाहों की सफाई की :

इबादत, तिलावत और सखावत (दान पुण्य) के शब-ए-बरात पर अपनों के गुनाहों की माफी मांगी जाती है। इसके लिए एक दिन पहले मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाहों की साफ सफाई करके रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई। इसके बाद रातभर जागकर इबादत की और रोजा रखा। कब्रिस्तान में जाकर बुजुर्गों के हक में दुआ की और खुदा से अपने गुनाहों की तौबा की और उनके जन्नत में जाने की इबादत भी की।

मौलाना ने बताया कि इस दिन उन सभी लोगों के लिए दुआ की जाती है जो दुनिया से जा चुके हैं और उनके नाम का खाना गरीबों को खिलाया जाता है। आमतौर पर चने की दाल का हलवा, सूजी का हलवा या कुछ मीठा भी बांटा जाता है।

देश में खुशहाली और शांति के लिए मांगी दुआ :

साथ ही मुस्लिम समाज ने देश में खुशहाली, शांति और भाईचारा कायम रखने के लिए भी खुदा से दुआ मांगी। मौलाना जमालुद्दीन बताते हैं कि इस दौरान सबसे पहले देश में अमन और तरक्की के लिए दुआ मांगी गई, फिर पड़ोसी मतलब अपने शहर और जिले के लिए और फिर स्वयं के लिए दुआ मांगी गई।

कब मनाई जाती है शब-ए-बरात

मुस्लिम कलेंडर के मुताबिक शाबान माह की 14 तारीख को शब-ए-बरात का त्योहार मनाया जाता है। यह रमजान से 15 दिन पहले मनाया जाता है। संभावना है 15 मई को रमजान की पहली तारीख यानी पहला रोजा होगा।

गुनाहों की माफी की रात :

शब-ए-बरात का मतलब छुटकारे की रात से है। इस्लाम मजहब में इस रात की बहुत अहमियत है। शब यानि रात, यह रात इबादत की रात है जब अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है और दिन में रोजा रखा जाता है।

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