तब्लीगी जलसा में उमड़ा जन सैलाब, आज हाईवे पर जाम की आशंका
नूंह जिले के गांव अड़बर में तीन दिवसीय तब्लीगी जलसे में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। उलेमाओं ने सच्चाई और सादगी पर जोर दिया। महिलाएं रोटियां बनाकर जलसे में योगदान दे रही हैं। जलसा स्थल पर खाने-पीने की बेहतर व्यवस्था की गई है। सोमवार को दुआ के साथ जलसे का समापन होगा, जिसमें दस लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है।

नूंह। नूंह जिले के गांव अड़बर में चल रहे तब्लीगी जमात के जलसे में रविवार को दूसरे दिन लोगों का सैलाब उमड़ा। बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मुख्य पंडाल के साथ-साथ आसपास के पूरे इलाके में लोगों की भीड़ नजर आई। दूर-दराज के इलाकों से लोग जलसे में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। उलेमाओं ने अपने बयान में सच्चाई और सादगी भरे जीवन पर जोर दिया। सोमवार को सुबह नौ बजे दुआ के बाद तीन दिवसीय जलसे का समापन होगा। रविवार को लोगों ने पूरे अनुशासन के साथ तकरीरें सुनीं। आयोजन स्थल पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवक लगातार सक्रिय रहे।
जलसा शांतिपूर्ण माहौल में चल रहा है और लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।महिलाओं का बड़ा योगदान, घर-घर से बन रही रोटियांइस जलसे की खास बात महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। गांवों में हर घर में सुबह से रात तक चूल्हा जल रहा है और महिलाएं रोटियां बनाकर जलसे में भेज रही हैं। हर घर से रोटियां इकट्ठा की जा रही हैं और ट्रैक्टर व टेम्पो के जरिए उन्हें जलसा स्थल तक पहुंचाया जा रहा है। महिलाएं खेती और पशुपालन की जिम्मेदारी निभाने के साथ यह सेवा भी कर रही हैं। उनके इस योगदान की सभी लोग सराहना कर रहे हैं। सामूहिक सहयोग की यह मिसाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।कैंटीन और खाने की व्यवस्था, दिनभर चलता है खानाजलसा स्थल पर लोगों के खाने-पीने की बेहतर व्यवस्था की गई है। यहां चार अलग-अलग कैंटीन बनाई गई हैं, जहां सुबह से देर रात तक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। खिदमत करने वाले लोग दस्तरखान लगाकर लोगों को खाना खिला रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग जलसा स्थल पर ही ठहर रहे हैं, इसलिए व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लगातार भोजन बनाया जा रहा है। साफ-सफाई और अनुशासन का भी ध्यान रखा जा रहा है। लोगों को बिना किसी परेशानी के भोजन मिल रहा है, जिससे व्यवस्था सुचारु बनी हुई है।100 एकड़ में फैला जलसा, पंडाल और सुविधाओं का विशेष इंतजामयह जलसा करीब 100 एकड़ क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। इसमें लगभग 25 एकड़ में मुख्य पंडाल बनाया गया है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पंडाल लगाए गए हैं। बड़ी संख्या में लोगों के ठहरने को देखते हुए चार स्थानों पर वजूखाने बनाए गए हैं। शौचालय की भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। रात में रुकने वाले लोगों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई गई है। आयोजन समिति द्वारा सभी जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है।दुआ में दस लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीदसोमवार सुबह जलसे का समापन दुआ के साथ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। अनुमान है कि करीब दस लाख लोग कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं। ऐसे में जलसा खत्म होने के बाद नूंह-अलवर नेशनल हाईवे पर जाम लगने की आशंका बनी हुई है। हालांकि पुलिस प्रशासन पहले से सतर्क है और ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए योजना बनाई गई है। जलसा स्थल से निकलने के लिए चार अलग-अलग गेट बनाए गए हैं, फिर भी वाहनों की अधिक संख्या के कारण दबाव बढ़ सकता है।लोगों की जरूरत के लिए बाजार सजाअड़बर गांव में चल रहे तीन दिवसीय इस्लामिक जलसा में एक तरफ बाजार भी लगाया गया है जिसमें जरूरत के अनुसार सभी जरूरी सामान मिल रहा है। लगाए गए बाजार में इत्र, टोपी, कपड़े, चटाई, कपड़े और खाने पीने का सामान की व्यवस्था देखने को मिली। तीन दिवसीय इस्लामिक जलसे में जहाँ एक ओर लाखों लोग इबादत के लिए जुट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों की जरुरत के लिए दुकानें सजी मिली। लोगों की मौजूदगी को देखते हुए यहाँ ज़रूरत के हर सामान की दुकानें सजी हुई दिखाई दी। जलसा में लगे बाजार में लोगों की बुनियादी ज़रूरतों से लेकर सबसे ज्यादा जोर इत्र और टोपियों की दुकानों पर देखने को मिला है। लोगों के लिए खुशबूदार इत्र और अलग अलग डिज़ाइन की टोपियां लोगों को भा गई। जलसे में रुकने वाले मुसाफिरों के लिए चटाई, कंबल और कपड़ों की बड़ी दुकानें लगाई गई हैं, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े। बाजार में खान-पान का भी इंतजाम किया गया। जहां लजीज पकवानों, मिठाई और नाश्ते के स्टॉल्स लगे हुए मिले। जलसे में लगे इस बाज़ार से स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को बड़ा मुनाफा मिला। जहां तीन दिन में ही कई गुणा तक कमाई हुई।
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