बिना स्वास्थ्य जांच के खिलाड़ी नहीं ले सकेंगे शिक्षा विभाग के खेलों में हिस्सा

Mar 01, 2026 10:33 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
share Share
Follow Us on

फरीदाबाद में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) द्वारा आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए खिलाड़ियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी। यह कदम खिलाड़ियों की वास्तविक आयु सत्यापित करने के लिए उठाया गया है, जिससे खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

बिना स्वास्थ्य जांच के खिलाड़ी नहीं ले सकेंगे शिक्षा विभाग के खेलों में हिस्सा

फरीदाबाद। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) द्वारा आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से पहले अब खिलाड़ियों की अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। स्वास्थ्य जांच की रिपोर्ट से आयु सत्यापित होगी। इसके बाद ही प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के योग्य होंगे। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की सही आयु का निर्धारण करना है। शिक्षा विभाग के अनुसार अंडर-11, 14,17 और 19 आयुवर्ग में छात्र एवं छात्राओं की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। पूर्व में कई बार यह शिकायत सामने आई थी कि बड़ी आयु के खिलाड़ी अपने से छोटे वर्ग में हिस्सा ले रहे हैं।

इससे छोटे खिलाड़ियों को नुकसान उठाना पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों की मेडिकल जांच कर उनकी वास्तविक आयु का सत्यापन किया जाएगा। आवश्यक होने पर जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान भी किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस कदम से खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। सरकारी अस्पताल की जांच ही मान्य रहेगी। राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में उठे थे सवाल एसजीएफआई द्वारा पिछले वर्ष नवंबर में जयपुर में आयोजित आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में राजस्थान की ओर से अंडर-14 आयुवर्ग में बड़े खिलाड़ियों के भाग लेने की शिकायत सामने आई थी। इस पर खिलाड़ियों एवं उनके साथ गए अध्यापकों ने भी विरोध दर्ज कराया था। हालांकि की विरोध के बाहर बड़ी आयु वाले खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया था। अगस्त-सितंबर में कराए जाते हैं खंड व जिला स्तरीय मुकाबले जिले में हर वर्ष अगस्त और सितंबर के दौरान खंड एवं जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इन प्रतियोगिताओं के आधार पर ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर के लिए टीमों का चयन होता है। ऐसे में प्रारंभिक स्तर पर ही आयु सत्यापन की प्रक्रिया लागू करने से आगे की प्रतियोगिताओं में विवाद की संभावना कम होगी। निष्पक्ष खेल माहौल की दिशा में कदम खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी था। आयु वर्ग के नियमों का उल्लंघन न केवल खेल भावना के विपरीत है, बल्कि इससे छोटे खिलाड़ियों का मनोबल भी टूटता है। शिक्षा विभाग का दावा है कि इस नई व्यवस्था से खेलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही अध्यापकों और कोच की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी, ताकि भविष्य में आयु संबंधी किसी प्रकार की अनियमितता न हो। इसे लेकर पिछले दिनों में शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों से सहायक एवं मौलिक शिक्षा अधिकारियों की बैठक आयोजित की थी। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बिना स्वास्थ्य जांच के खिलाड़ी प्रतियोगिता में नहीं लेगें। स्वास्थ्य जांच से ही आयु सत्यापन स्वीकार होगा। -प्रेम शर्मा, सहायक मौलिक शिक्षा अधिकारी

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।