धमाकों की वजह जानने के लिए नमूने भरे, दस्तावेज खंगाले
फरीदाबाद के सेक्टर-24 मुजेसर में वर्कशॉप में सोमवार को हुई भीषण आग का कारण जानने के लिए जांच तेज कर दी गई है। फॉरेंसिक टीम ने मौके पर नमूने लिए हैं और एनओसी ना मिलने के कारणों की जांच कर रही है। हादसे में 37 लोग झुलस गए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है।

फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। सेक्टर-24 मुजेसर स्थित वर्कशॉप में सोमवार शाम हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज कर दी गई है। बुधवार को पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब एक घंटे तक निरीक्षण किया और विभिन्न स्थानों से नमूने लिए। वहीं टीम ने दस्तावेज भी खंगाले। नमूनों की रिपोर्ट आने पर जांच टीमों को मामले की जांच में मदद मिलेगी। मैसर्स कालका जी लुब्रिकेंट और शिव स्टील कंपनी के पास दमकल विभाग से फायर एनओसी न लिए जाने की आशंका जताई जा रही है। जांच टीमें एनओसी के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह बड़ी लापरवाही मानी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि वहां पर आग से बचाव के पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम भी नहीं थे, जिससे आग तेजी से फैल गई और बड़ा हादसा हो गया। यदि इंतजाम होते तो यह बड़ा हादसा न हुआ होता । एसडीएम बड़खल त्रिलोक चंद के नेतृत्व में मंगलवार को सात सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी। यह टीम हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों की स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही की जांच कर रही है। टीम विभिन्न विभागों से रिकॉर्ड भी जुटा रही है, जिनमें फायर सेफ्टी, औद्योगिक सुरक्षा और लाइसेंस संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस प्रवक्ता यशपाल यादव ने बताया कि हादसे में झुलसे लोगों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। एस्कॉटर्स अस्पताल में फिलहाल चार घायलों का इलाज चल रहा है। मंगलवार तक यहां 16 घायल भर्ती थे। हादसे के दिन कुल 23 घायलों को एस्कॉटर्स अस्पताल लाया गया था, जिनमें से सात को अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया गया। वहीं बीके अस्पताल में 14 घायल पहुंचे थे, जिनमें से 10 को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया था। पुलिस के अनुसार अधिकांश घायलों की हालत स्थिर है, हालांकि कुछ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बता दें कि मुजेसर थाना पुलिस ने इस मामले में सिपाही अजनेश कुमार की शिकायत पर कालका जी लुब्रिकेंट और शिव स्टील वर्कशॉप संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। सोमवार शाम आगजनी होते ही इस जगह अफरातफरी मच गई। हादसे में कुल 37 से अधिक लोग झुलस गए थे, जिनमें फायर ब्रिगेड कर्मी, वर्कशॉप मालिक, पुलिसकर्मी और राहगीर भी शामिल हैं। आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की कई गाड़ियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। अति ज्वलनशील केमिकल के भंडारण के लिए लाइसेंस जरूरी अति ज्वलनशील केमिकल रखने और सामान्य केमिकल की भी यदि मात्रा ज्यादा है तो भंडारण के लिए लाइसेंस जरूरी हाेता है। औद्योगिक कार्यों से उपयोग में आने वाले तेल और केमिकल की बड़ी मात्रा रखने के लिए भी सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। लेकिन घटनास्थल पर सड़क किनारे केमिकल से भरे ड्रम खुले में रखे हुए थे। यहां सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही थी। सुरक्षा मानकों की लापरवाही बतरने पर प्रशासन कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय ले सकता है। फिलहाल प्रशासनिक और पुलिस टीमें हर पहलू की जांच में जुटी हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट और जांच टीम की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग कैसे फैली थी। इस हादसे ने औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
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