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 विस्फोटक मिलने के बाद स्मार्ट सिटी के खुफिया तंत्र पर उठे सवाल

विस्फोटक मिलने के बाद स्मार्ट सिटी के खुफिया तंत्र पर उठे सवाल

संक्षेप:

विस्फोटक मिलने के बाद स्मार्ट सिटी के खुफिया तंत्र पर उठे सवाल -खुफिया तंत्र को मजबूत करने की है जरूरत -बीट सिस्टम को भी कारगर करने की है जरूरत फरीदाबाद। केशव भारद्वाज भारी मात्रा में विस्फोट मिलने और...

Nov 11, 2025 09:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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विस्फोटक मिलने के बाद स्मार्ट सिटी के खुफिया तंत्र पर उठे सवाल -खुफिया तंत्र को मजबूत करने की है जरूरत -बीट सिस्टम को भी कारगर करने की है जरूरत फरीदाबाद। केशव भारद्वाज भारी मात्रा में विस्फोट मिलने और अलफला यूनिवर्सिटी में संदिग्ध आतंकियों की मौजूदगी ने स्मार्ट सिटी के खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में विस्फोट और यहां मिली विस्फोटक सामग्री मिलने से स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पैदा हो गई है। आतंकी संगठनों और आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले बदमाशों का वारदात को अंजाम देने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन आतंकी संगठनों से जुड़े दहशतगर्दों की गिरफ्तारियों से एक बात सामान्य पाई गई है कि ये अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए किराए का कमरा जरूर लेते हैं और पुरानी गाड़ियों की खरीद-फ्रोख्त करते हैं।

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इसके लिए घरों को किराए पर लेने वाले लोगों के सत्यापन की व्यवस्था वजूद में है। फिर भी इस व्यवस्था के प्रति न तो लोग जागरूक हैं और न ही पुलिस इसको लेकर गंभीर है। पुलिस की ओर से इस सत्यापन प्रक्रिया को आम लोगों के जरिए से सरल और पुलिसकर्मियों का लोगों से जुड़ाव न होने के कारण लोग भी पुलिस के पचड़े में पड़ने से बचते हैं। लोग थानों तक सत्यापन करने के लिए नहीं जाते हैं। वहीं थाना क्षेत्र में रहने वाले बाहरी लोगों पर नजर रखने के लिए पुलिस का बीट सिस्टम काफी कारगर साबित हो चुका है। अधिकारियों की ओर से बीट व्यवस्था को कारगर बनाने के लिए कई बार कवायद हुई हैं। फिर भी जिले में यह कवायद पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। वारदात की फिराक में घूम रहे दहशतगर्द और असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए बनाई गई व्यवस्था पर अमल न होने का सबसे ज्यादा फायदा आतंकी संगठनों को मिलता है। इसी तरह पुरानी कार और बाइक बेचने वालों से खरीदारों पर भी पुलिस की ओर से नजर नहीं रखी जाती है। इसका फायदा आतंकी संगठनों को मिल रहा है। वे आसानी से पुराना वाहन खरीदते हैं और अपने मिशन को अंजाम देकर गायब हो जाते हैं। -- सिर्फ एक पुलिसकर्मी के हवाले रहता है पूरा थाना क्षेत्र: थाना क्षेत्र में चल रहीं गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से एक पुलिसकर्मी की डयुटी लगाई जाती है। थाना क्षेत्र की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी देना इनकी जिम्मेदारी होती है। थाना क्षेत्र का एरिया और काम ज्यादा होने की वजह से इस तरह की गतिविधियों की जानकारी उन्हें नहीं लग पाती है। इसी तरह गुप्तचर विभाग भी प्रत्येक थाना क्षेत्र सक्रिय होता है, लेकिन उनका भी फोकस रोज की गतिविधियों पर ज्यादा रहता है। सेवानिवृत्त अधिकारी दर्शन लाल मलिक बताते हैं कि मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के लिए आमूल-चूल परिवर्तन करनेकी जरूरत है। पुलिस को इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट की जरूरत भी होती है। आतंकी नेटवर्क को खंगालना इतना भी आसान नहीं होता है। ------ ---