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हिंदी न्यूज़ NCR फरीदाबादसूरजकुंड मेले में शिकारा से लेकर आध्यामिक स्थल वैष्णो देवी की कृति के दर्शन होंगे

सूरजकुंड मेले में शिकारा से लेकर आध्यामिक स्थल वैष्णो देवी की कृति के दर्शन होंगे

हिन्दुस्तान टीम,फरीदाबादNewswrap
Thu, 28 Oct 2021 05:30 PM
सूरजकुंड मेले में शिकारा से लेकर आध्यामिक स्थल वैष्णो देवी की कृति के दर्शन होंगे

फरीदाबाद। विश्व प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला-2022 में जम्मू-कश्मीर राज्य की लोककला-संस्कृति और हस्तशिल्प कला की धूम रहेगी। कश्मीर वादियों की झीलों पर राज करने वाली शिकारा से लेकर आध्यामिक स्थलों तक के दर्शन इस बार मेले में होंगे। 35वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का थीम स्टेट जम्मू-कश्मीर को बनाया गया है। इसके मद्देनजर मेला परिसर जम्मू-कश्मीर की कला-संस्कृति से सराबोर होगा। इसके लिए जम्मू-कश्मीर पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों का एक प्रतिनिधि मंडल शुक्रवार को या फिर अगले सप्ताह सूरजकुंड मेला परिसर का दौरा करेंगे और इसी के साथ मेले की तैयारियां धरातल पर शुरू हो जाएंगी।

चार फरवरी से 20 फरवरी-2022 तक आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में लोगों को हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के अलावा विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक धरोहरों की जानकारी के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की झलक देखने का मौका मिलेगा। भारतीय लोककला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए फरीदाबाद के सूरजकुंड में प्रतिवर्ष हस्तशिल्प मेला लगाया जाता है। जिसमें देश-विदेश के हस्तशिल्पी अपने हुनर का प्रदर्शन करते हैं। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय के साथ मिलकर हरियाणा पर्यटन निगम मेले का आयोजन करता है। थीम स्टेट के रूप में प्रतिवर्ष एक प्रदेश का चयन किया जाता है। जो अपनी कला-संस्कृति से यहां आने वाले दर्शकों को रूबरू करवाने के लिए मेला परिसर की सजावट अपने ढंग से करता है। अपनी कला में राष्ट्रीय अवार्ड हासिल कर चुके शिल्पकारों को देश भर से इसमें आमंत्रित किया जाता है। शिल्पकारों को यहां अपनी कला के प्रदर्शन के साथ मार्केटिंग का मौका भी मिलता है।

22 साल बाद एक बार फिर थीम स्टेट बना जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर को 22 साल बाद सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का थीम स्टेट बनने का मौका मिला है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर वर्ष 2000 में इस मेले का थीम स्टेट बना था। उस समय मेले को करीब पांच लाख दर्शक देखने पहुंचे थे और देश भर के करीब 357 हस्तशिल्पी मेले में अपना हुनर दिखाने पहुंचे थे। जबकि अब मेले का विस्तार हो चुका है। अंतर्राष्ट्रीय दर्जा मिल चुका है। मेले में अब 1200 से अधिक हस्तशिल्पी एक हजार लोक कलाकार और करीब 13 लाख दर्शक मेला देखने आते हैं। मेले में वर्ष 2000 में बनाए गए जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प मंडप, शिलाएं और शाह हमदान दरगाह की कृतियां अभी मेला परिसर में मौजूद हैं।

मेला परिसर में बनी हुई है श्रीनगर की खानकाह ऑफ शाह हमदान दरगाह

श्रीनगर में स्थित खानकाह ऑफ शाह हमदान दरगाह की कृति मेला परिसर में वर्ष 2000 में तैयार की गई थी, तभी से यह मेला परिसर में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इस खानकाह-ई-मोला के नाम से भी जाना जाता है। इसे सूफी संत मीर सैयद अली हमदानी के सम्मान में वहां बनवाया गया था, जहां सैंकड़ो लोग प्रार्थना करने जाते हैं। मेले में इस बार कुछ अन्य धार्मिक स्थल त्रिकुट पर्वत पर स्थित वैष्णो देवी, अमरनाथ गुफा और झीलों की शान कही जाने वाली शिकारा की कृतियां भी दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होंगी।

नीरज कुमार, प्रबंध निदेशक,हरियाणा पर्यटन निगम: 29 अक्तूबर या इसके आसपास जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों की टीम मेला परिसर का दौरा करेगी। इसके बाद मेले की तैयारिया धरातल पर शुरू हो जाएंगी।

संभावित 35वें सूरजकुंड मेले पर एक नजर

मेला क्षेत्रफल: 80 एकड़

शिल्पकार 1200 संभावित

लोक कलाकार 600 संभावित देसी-विदेशी

थीम स्टेट जम्मू-कश्मीर

कंट्री पार्टनर ब्रिटेन

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