Faridabad News: बदलते मौसम में बुखार के साथ दौरे का खतरा बढ़ा
Faridabad News: बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव का असर बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। तेज बुखार के साथ बच्चों में न्यूरोलॉजिकल समस्या के मामले बढ़ रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में गंभीर मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल संक्रमण के कारण बच्चों में तेज बुखार की समस्या बढ़ रही है।

Faridabad News: फरीदाबाद, धनंजय चौहान। बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव का असर बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। तेज बुखार के साथ बच्चों में न्यूरोलॉजिकल समस्या के मामले बढ़ रहे हैं। इनमें मिर्गी जैसे दौरे पड़ने की शिकायत वाले मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना दो से तीन गंभीर मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। शहर में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और बीके सहित करीब 15 से अधिक निजी अस्पताल हैं।
बच्चों में बुखार की समस्या
चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव के दौरान वायरल और अन्य संक्रमण के कारण बच्चों में तेज बुखार की समस्या बढ़ जाती है। कुछ बच्चों में बुखार के साथ झटके आने या बेहोशी जैसी स्थिति भी देखने को मिल रही है। पहले से मिर्गी की समस्या से जूझ रहे बच्चों में भी संक्रमण और तेज बुखार के कारण दौरे बढ़ने का खतरा रहता है। बीके अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल ने बताया कि पिछले एक महीने से वायरल मरीजों की संख्या में 20 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। पहले जहां ओपीडी में 60 से 70 मरीज आते थे। अब रोजाना लगभग 100 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों में तेज बुखार की समस्या सबसे अधिक सामने आ रही है। समय पर इलाज न कराया जाए तो यह बुखार दिमाग पर चढ़ जाता है, जिससे मिर्गी का खतरा रहता है। मरेंगो एशिया अस्पताल की न्यूरोलॉजी विभाग की निदेशक डॉ. सुषमा शर्मा ने कहा कि बदलते मौसम में वायरल संक्रमण और तेज बुखार के कारण बच्चों में दौरे पड़ने की समस्या बढ़ सकती है। मिर्गी से पीड़ित बच्चों में बुखार और संक्रमण दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। अभिभावक बच्चे का तापमान नियंत्रित रखें और दौरे या बेहोशी की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। एकॉर्ड अस्पताल के
चिकित्सा सलाह और इलाज
न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि बच्चों में तेज बुखार के साथ झटके, बेहोशी या व्यवहार में बदलाव दिखे तो इसे सामान्य बुखार मानकर घर पर इलाज न करें। समय पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है। मिर्गी के मरीजों की दवा नियमित चलती रहनी चाहिए। दवा बंद करने या खुराक बदलने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही करें।
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