एचएसवीपी को सेक्टर बसाने के लिए जमीन नहीं मिल रही
फरीदाबाद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) नए सेक्टरों के लिए जमीन खरीदने में कठिनाई का सामना कर रहा है। पिछले प्रयासों में किसानों की बेरुखी और मुआवजे की कमी के कारण योजनाएं विफल हो गई हैं। एचएसवीपी अब विवाद मुक्त जमीनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से किसानों से संपर्क कर रहा है।

फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। औद्योगिक नगरी में रिहायशी और कमर्शियल विस्तार का सपना देख रहे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के सामने जमीन की बड़ी दीवार खड़ी हो गई है। आलम यह है कि शहर को विस्तार देने के लिए एचएसवीपी को सेक्टर बसाने के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल रही है। हालांकि, प्राधिकरण ने एक बार फिर से जमीन खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी है। शहर में एचएसवीपी के अभी 49 सेक्टर है। इतने ही सेक्टर करीब नगर निगम के अंतर्गत आते हैं। बढ़ती आबादी और मास्टर प्लान 2031 के तहत एचएसवीपी ने ग्रेटर फरीदाबाद में 12 नए सेक्टर बसाने की योजना तैयार की है।
इन सेक्टरों के माध्यम से बढ़ती आबादी को सुनियोजित आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। अधिकारियों के मुताबिक, ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से किसानों से संपर्क साधा जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर जमीन की खरीद की जा सके। लेकिन पिछली घटनाओं ने प्राधिकरण की चिंता बढ़ा दी है। पिछले प्रयास रहे नाकाम यह पहली बार नहीं है जब एचएसवीपी जमीन के लिए हाथ-पैर मार रहा है। पिछले वर्ष भी प्राधिकरण ने 19 गांवों की करीब 4500 एकड़ जमीन खरीदने का प्रयास किया था। इसके लिए बाकायदा नोटिफिकेशन और सर्वे की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। लेकिन किसानों की बेरुखी और मुआवजे की दरों पर असहमति के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। अधिकतर किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन को औने-पौने दामों पर देने से इनकार कर दिया, जिससे एचएसवीपी की विस्तार योजना ठंडे बस्ते में चली गई। जमीन न मिलने के मुख्य वजह किसान नेता सतपाल नरवत ने बताया कि किसान वर्तमान बाजार भाव के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकारी कलेक्टर रेट काफी कम हैं। वहीं ग्रेटर फरीदाबाद और आसपास के इलाकों में प्राइवेट बिल्डर्स किसानों को सीधे बेहतर डील ऑफर कर रहे हैं, जिससे सरकारी खरीद में अड़चन आ रही है। वहीं किसानों के लिए ई-भूमि पोर्टल पर पंजीकरण करवाना और लंबी प्रक्रिया अभी भी सिरदर्द बनी हुई है। यहां बसाए जाएंगे नए सेक्टर शहर में मास्टर प्लान 2031 के तहत सेक्टर 94 ए, 96, 96 ए, 97 ए, 99, 100, 101, 102, 103, 140, 141 और 142 नए सेक्टरों को शामिल किया गया हैं। इनमें सेक्टर 100 एक कमर्शल सेक्टर है। सेक्टर 96 ए और 97 ए पब्लिक व सेमी पब्लिक यूज के लिए हैं, जिनमें सरकारी विभागों के कार्यालय, शिक्षण संस्थान व अस्पताल आदि बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा अन्य सभी नौ सेक्टर रिहायशी सेक्टर हैं। इन सेक्टरों के लिए कुल 18 गांवों की 4500 एकड़ जमीन को खरीदा जाना है। सेक्टर 140, 141 व 142 बल्लभगढ़ की तरफ पड़ते हैं। इनके लिए सोतई, सुनपेड़, साहुपुरा, मलेरना व जाजरू की जमीन खरीदी जानी है। यह सेक्टर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे लिंक रोड व जेवर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए बन रहे इंटरचेंज के नजदीक हैं। बाकी सभी सेक्टर तिगांव क्षेत्र में होंगे। बढ़ता दबाव और वैकल्पिक योजनाएं शहर में आबादी का घनत्व तेजी से बढ़ रहा है। पुराने सेक्टरों में जगह की कमी और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते बोझ को देखते हुए नए सेक्टरों का बसना अनिवार्य हो गया है। एचएसवीपी अब उन जमीनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो विवाद मुक्त हैं या जहां किसान स्वेच्छा से जमीन देने को तैयार हैं। प्राधिकरण अब ''लैंड पूलिंग'' जैसी नीतियों को प्रमोट कर रहा है, ताकि किसानों को विकसित जमीन में हिस्सेदार बनाया जा सके और नकदी का बोझ कम हो। 12 नए सेक्टरों के लिए ई-भूमि पोर्टल के जरिए 19 गांवों की पहचान की गई है। गांवों के नाम सार्वजनिक कर दिए गए हैं जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। किसान 30 अप्रैल तक स्वेच्छा से अपनी जमीन का विवरण पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। - संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एचएसवीपी
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