एहतियादी कदम बचाएंगे केमिकल एवं सिंथेटिक रंगों के दुष्प्रभावों से

Mar 01, 2026 10:47 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में इस बार चंद्र ग्रहण के कारण होली का पर्व होलिका दहन के एक दिन बाद मनाया जाएगा। बाजार में रंगों की बिक्री तेज हो गई है, लेकिन केमिकल युक्त रंगों के दुष्प्रभावों से सावधानी बरतने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों के उपयोग की सलाह दी है।

एहतियादी कदम बचाएंगे केमिकल एवं सिंथेटिक रंगों के दुष्प्रभावों से

फरीदाबाद। इस बार चंद्र ग्रहण के चलते होलिका दहन के एक दिन बाद होली खेली जाएगी। जिलेवासी होली को रंगीन होली बनाने की तैयारियां कर रहे हैं। बाजारों में होली से पहले रंगों की बिक्री तेज हो गई है। गुलाल के साथ सिंथेटिक और केमिकल युक्त रंग भी खुलेआम बेचे जा रहे हैं। सिंथेटिक एवं केमिकल युक्त रंगों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जिलेवासियों को विशेष ध्यान रखना होगा। कुछ एहतियाती कदमों से केमिकल एवं सिंथेटिक रंगों से होने वाले दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं। ओल्ड फरीदाबाद, एनआईटी और बल्लभगढ़ के बाजारों में सजे अस्थायी स्टॉलों पर सस्ते दामों में चमकीले और गहरे रंग ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।

लोग एक-दूसरे को बुरी तरह रंगने के चक्कर केमिकल एवं सिंथेटिक रंगों का प्रयोग करने से भी परहेज नहीं करते हैं। ऐसे रंग त्वचा और आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। होली के उमंग में लोग रंगों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते, जिससे बाद में त्वचा संक्रमण, एलर्जी और आंखों की समस्याएं सामने आती हैं। खासकर बच्चों की त्वचा अधिक संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें सबसे अधिक खतरा रहता है। भारी धातुओं और इंडस्ट्रियल डाइज का खतरा जानकारों के मुताबिक बाजार में बिकने वाले कई सस्ते रंगों में निकिल, कोबाल्ट, लेड, मरकरी, क्रोमियम और सिलिका जैसी भारी धातुएं पाई जाती हैं। इसके अलावा इंडस्ट्रियल डाइज, माइका डस्ट और यहां तक कि इंजन ऑयल तक मिलाया जाता है, जिससे रंग अधिक गाढ़ा और चमकदार दिखे। बीके अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीएस राठी ने बताया कि कि लेड और मरकरी जैसे तत्व त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। क्रोमियम और निकिल से त्वचा पर चकत्ते, खुजली और जलन हो सकती है। वहीं माइका डस्ट आंखों में जाने पर सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है। इंजन ऑयल मिश्रित रंग त्वचा के रोमछिद्र बंद कर देते हैं, जिससे फोड़े-फुंसी और एलर्जी की समस्या हो सकती है। त्वचा और आंखों पर पड़ता है सीधा असर सर्वाेदय अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. आस्था गुप्ता का कहना है कि केमिकल युक्त रंगों से डर्मेटाइटिस, एलर्जी, लाल चकत्ते, जलन और बालों के झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जयद्रथ का कहना है कि आंखों में रंग जाने पर कंजक्टिवाइटिस, सूजन, दर्द और दृष्टि संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। अस्थमा या सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए पाउडर रंग और अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनके कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। लोगों को बरतनी होगी सावधानी होली के रंग में किसी प्रकार की भंग न पड़े, इसके लिए स्मार्ट सिटी के लोगों को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। प्रशासन और चिकित्सकों ने भी लोगों से सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की अपील की है। ऐसे करें बचाव - हर्बल और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें। घर पर हल्दी, चंदन, गुलाब की पंखुड़ी या फूलों से बने रंग सुरक्षित विकल्प हैं। - त्वचा पर पहले से तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं। इससे रंग सीधे त्वचा में प्रवेश नहीं करेगा। - आंखों और चेहरे की सुरक्षा करें। चश्मा पहनें और रंग लगाते समय आंखें बंद रखें। - पूरी बाजू के कपड़े पहनें। शरीर का अधिक हिस्सा ढका रहेगा तो रंग का असर कम होगा। - खुले और बिना लेबल वाले रंग खरीदने से बचें। पैक्ड और प्रमाणित ब्रांड को प्राथमिकता दें। - रंग खेलने के तुरंत बाद स्नान करें। हल्के साबुन से त्वचा को साफ करें, जोर से रगड़ने से बचें। - आंख में रंग जाने पर तुरंत साफ पानी से धोएं। जलन बनी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करें। - बच्चों पर विशेष ध्यान दें। उन्हें केमिकल वाले रंगों से दूर रखें। -बालों को खराब होने से बचाने के लिए होली खेलने से पूर्व सरसों या नारियल के तेल से मालिश करें।

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