अस्पताल मरीजों की रिपोर्ट जल्द स्वास्थ्य विभाग को दें : उपायुक्त
पलवल के छांयसा गांव में पीलिया और हेपेटाइटिस से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने स्थिति का जायजा लिया। उपायुक्त ने ग्रामीणों को बताया कि मौतों का कारण जानने के लिए रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं। स्वास्थ्य शिविरों में मुफ्त दवाइयां और जांच की जा रही हैं। गांव में साफ पानी और स्वच्छता पर ध्यान दिया जा रहा है।

पलवल। छांयसा गांव में पीलिया और हेपेटाइटिस से हुई मौतों को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। रविवार को उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने छांयसा गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि मौतों का कारण जानने के लिए अस्पतालों से रिकॉर्ड मांगा गया है। उपायुक्त ने बताया कि जिन परिवारों में मौतें हुई हैं, उनकी मेडिकल हिस्ट्री तैयार की जा रही है। मृतकों का इलाज जिन अस्पतालों में हुआ था, वहां से पूरी जानकारी मंगाई जा रही है। इसके लिए नल्हड़ मेडिकल अस्पताल, फरीदाबाद और गुरुग्राम के अस्पतालों से संपर्क किया गया है। रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि बीमारी की असली वजह क्या थी।
इससे संक्रमण के स्रोत की पहचान करने में मदद मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि सही जानकारी मिलने पर ही प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में भी सहायता मिलेगी। उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीणों की सेहत जिला प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। गांव में फैल रही बीमारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के साथ उन्होंने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और जरूरी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। गांव में नियमित जांच, दवाइयों की उपलब्धता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डीसी ने ग्रामीणों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इलाज और जांच में कमी नहीं रहने दी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि बीमारी पर जल्द नियंत्रण पाया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। शिविर लगाकर मुफ्त में दवाइयां दी जा रही : गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें लोगों की रक्त जांच, परामर्श और मुफ्त दवाइयां दी जा रही हैं। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्थिति की जानकारी ले रही हैं। हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी और लिवर टेस्ट किए जा रहे हैं। संदिग्ध मरीजों को तुरंत इलाज के लिए भेजा जा रहा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त न किया जाए। शिविरों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। उबला हुआ पानी पीने की सलाह उपायुक्त ने कहा कि दूषित पानी और गंदगी बीमारी फैलने का बड़ा कारण है। गांव में साफ पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। क्लोरीन टैबलेट बांटी गई हैं और फॉगिंग करवाई जा रही है। लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य टीमें सिरिंज के दोबारा इस्तेमाल से बचने और झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज न कराने के लिए जागरूक कर रही हैं। स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। 12 और नए मरीज मिले गांव छांयसा में रविवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेपेटाइटिस सी के 12 नए मरीजों की पुष्टि की गई है। इसके बाद गांव में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। अब तक बीमारी से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि हेपेटाइटिस से 4 मौत पुष्टि विभाग ने की, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों में दहशत इस कदर है कि लोग छोटी-सी तबीयत खराब होने पर भी जांच कराने के लिए स्वास्थ्य शिविरों की ओर दौड़ रहे हैं। हेल्पलाइन नंबर भी जारी छांयसा में मरीजों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने 01275-240022 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल संक्रमण फैलने का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की गई है। युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा। कमेटियां बनाकर गांव स्तर पर निगरानी की जा रही है। सिविल सर्जन के अनुसार केस मिलने पर पूरे परिवार की जांच की जा रही है। पेयजल के आठ नमूने फेल गांव में पेयजल को लेकर हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। बीते दिनों बीमारी और मौतों की घटनाओं से सहमे ग्रामीणों के बीच अब लगातार फेल हो रहे पानी के नमूनों ने चिंता बढ़ा दी है। रविवार को जांच के लिए भेजे गए पेयजल के आठ नमूने फेल पाए गए। इससे पहले शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव के अलग-अलग मोहल्लों और जल स्रोतों से 28 सैंपल भरे थे। ताजा रिपोर्ट के बाद अब तक कुल 31 नमूने जांच में फेल हो चुके हैं।
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