Faridabad News: बीके अस्पताल का हार्ट सेंटर बंद, कंपनी ने अपना सामान समेटा

हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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Faridabad News: फरीदाबाद में हार्ट सेंटर का प्रबंधन ने सरकार के भुगतान नहीं होने पर हार्ट सेंटर को स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। मरीजों को अब निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ेगा। केंद्र में पहले भी कई विवाद रहे हैं। अब हार्ट सेंटर का सामान निकालने पर शिकायतें भी हुई हैं।

Faridabad News: बीके अस्पताल का हार्ट सेंटर बंद, कंपनी ने अपना सामान समेटा

Faridabad News: फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। सस्ते और अच्छे हृदय रोग उपचार के लिए आने वाले लोगों को बड़ा झटका लग सकता है। उन्हें उपचार के लिए अब निजी अस्पताल की ओर रुख करना पड़ सकता है। प्रदेश सरकार द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के चलते बीके अस्पताल में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में चल रहे हार्ट सेंटर प्रबंधन ने इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया है। प्रबंधन ने तृतीय तल पर स्थित हार्ट सेंटर को खाली करना शुरू कर दिया है। इसका सामान केरल भेजा जा रहा है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में बीके अस्पताल में पीपीपी मोड पर हार्ट सेंटर शुरू किया था। इसके संचालन का काम मेडिट्रीना हॉस्पिटल्स को दिया गया था। यहां निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम दरों पर एंजियोप्लास्टी एवं एंजियोग्राफी सहित कई अन्य तरह की सुविधाएं मिलती थीं, लेकिन विवादों में आने के बाद से हार्ट सेंटर पर ग्रहण लग गया और करीब 10 महीनों तक हार्ट सेंटर बंद रहा था। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के प्रयासों से 20 मार्च को हार्ट सेंटर दोबारा शुरू कराया गया था। वहीं जिला स्वास्थ्य विभाग ने जल्द से जल्द पूरे भुगतान का आश्वासन दिया था। इसके बाद हार्ट सेंटर प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने कई बार स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क कर भुगतान जल्द से जल्द जारी करने के लिए कहा, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अंत में 21 जुलाई को नोटिस जारी कर बंद करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूटी और 14 अगस्त को हार्ट सेंटर की सभी सुविधाएं बंद कर दी गईं। तब से हार्ट सेंटर बंद चल रहा है। रविवार को हार्ट सेंटर का सामान निकालना शुरू दिया। वहीं कार्यरत स्टाफ को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे अन्य हार्ट सेंटरों में स्थानांतरित कर दिया गया। हार्ट सेंटर बंद होने के बाद से ही मरीज परेशान हैं。

हार्ट सेंटर के इंचार्ज का बयान

हार्ट सेंटर के इंचार्ज मनदीप सिंह ने बताया कि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की मध्यस्थता के बाद 20 मार्च को हार्ट सेंटर शुरू किया गया था, लेकिन इस बार आयुष्मान, बीपीएल सहित प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों का उपचार नहीं किया गया। उनके अनुसार, सरकार पर पहले का करीब 8.25 करोड़ रुपये बकाया है। सेंटर के शुरू होने के बाद तीन महीने में करीब 100 एंजियोप्लास्टी एवं एंजियोग्राफी और हृदय संबंधी अन्य उपचार किए गए हैं। इनका करीब 25 लाख रुपये बकाया है। सरकार पिछले और अब के बकाये का भुगतान नहीं कर रही है। इसके चलते यह फैसला लिया गया।

सेवाएं बंद किया जाना

हार्ट सेंटर के इंचार्ज मनदीप ने बताया कि फिलहाल हार्ट सेंटर को खाली किया जा रहा है। यदि सरकार पूरा भुगतान करती है तो नया सेटअप तैयार करके सुविधाएं देना शुरू करेंगे। फिलहाल के लिए सेवाएं बंद हैं। एक निजी संस्थान के पास सीमित संसाधन होते हैं और उन्हें जुटाने के लिए पैसों की आवश्यकता होती है।

पहले भी विवादों में रहा है हार्ट सेंटर

बीके अस्पताल का हार्ट सेंटर पहले से ही विवादों में रहा है। एक एमबीबीएस डॉक्टर ने असली डॉक्टर के कागजात का गलत इस्तेमाल करके खुद को कार्डियोलॉजिस्ट बताया और दर्जनों सर्जरी कर डाली थीं। यह मामला काफी तूल पकड़ा था। एक ही चिकित्सा उपकरण को बार-बार इस्तेमाल करने का मामला भी प्रकाश में आया था। उस समय हार्ट सेंटर काफी चर्चाओं में रहा था। एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा सरकारी योजनाओं और फंड में गड़बड़ी तथा फर्जी बिल बनाने को लेकर भी जांच की गई। इससे पूर्व एक तकनीशियन द्वारा भी पांच साल तक डॉक्टर की तरह रिपोर्ट देने का मामला सामने आया था। इसी प्रकार अन्य कई मामलों के चलते हार्ट सेंटर शुरुआत से ही विवादों में रहा है।

हार्ट सेंटर प्रबंधन के खिलाफ दी शिकायत

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बिना सूचना दिए गए हार्ट सेंटर से सामान निकालने पर एडवोकेट संजय गुप्ता ने एनआईटी पुलिस चौकी में शिकायत दी है। उन्होंने मेडिट्रीना हार्ट सेंटर पर मशीन सहित अन्य सामान चोरी करने का आरोप लगाया है। सूचना पाकर पहुंचे एडवोकेट संजय गुप्ता बीके अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमओ और पीएमओ की अनुमति का पत्र मांगा, लेकिन मौके पर मौजूद हार्ट सेंटर इंचार्ज मनदीप कोई भी प्रस्तुत नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि पीएमओ और सीएमओ की अनुमति के बिना सरकारी अस्पताल से सामान निकालना चोरी है। इस संबंध में एनआईटी तीन चौकी को शिकायत दी गई है। उन्होंने बताया कि इनके कान्ट्रैक्ट में भी लिखा हुआ है कि हार्ट सेंटर में रखा सभी सामान सरकारी प्रॉपर्टी होगी।

एडवोकेट संजय गुप्ता को चोरी का शक था। उनकी शिकायत पर हार्ट सेंटर का सामान अस्पताल में ही वापस रखवा लिया। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्पष्ट करेंगे। यदि स्वास्थ्य अधिकारी सहमत होंगे, तो हार्ट सेंटर प्रबंधन अपना सामान ले जा सकेंगे।

-दिनेश कुमार, चौकी इंचार्ज, एनआईटी तीन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

✦हार्ट सेंटर बंद होने का कारण क्या है?−
हार्ट सेंटर बंद होने का कारण प्रदेश सरकार द्वारा भुगतान नहीं किए जाना है।
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