सरस मेले में जूट से बने बैग लोगों की पहली पसंद बने

Jan 03, 2026 11:28 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद के एचएसवीपी मैदान पर चल रहे सरस आजीविका मेले में परवेश के जूट के बैग लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं। उनके उत्पादों की मांग इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दोबारा स्टॉक मंगाना पड़ा। परवेश ने ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर 300 महिलाओं को रोजगार दिया है।

सरस मेले में जूट से बने बैग लोगों की पहली पसंद बने

फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित एचएसवीपी मैदान पर चल रहे सरस आजीविका मेले में गुरुग्राम के गांव ऊंचा माजरा से आई परवेश के जूट के बैग लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। उन्हें दोबारा से स्टॉक मंगाना पड़ा है। सरस मेले के समापन को अब एक दिन शेष रह गया है। इसके चलते अधिक संख्या में लोग पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं। परवेश वर्ष 2017 ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हुई हैं और सहेली महिला स्वयं सहायता समूह बनाया। इनके जूट के थैले व बैग देश के विभिन्न राज्यों में भी पसंद किए जाते हैं और पूरे वर्ष ऑर्डर आते रहते हैं।

दीवाली के ऑर्डर पूरे करने के लिए छह महीने पहले काम शुरू कर देती है। वहीं हरियाणा सरकार भी इन्हें ऑर्डर देती है। परवेश ने बाजार में बने रहने के लिए अपने उत्पाद में नवीनता को भी समायोजन किया है। जूट के साथ चमड़े का भी प्रयोग करती हैं। गांव में 19 स्वयं सहायता समूह हैं परवेश ने बताया कि उनके गांव की महिलाओं के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन जीविका का सबसे बड़ा साधन बन गया है। गांव में 19 स्वयं सहायता समूह हैं, जबकि दो ग्राम संगठन हैं। इससे 300 महिलाएं जुड़ी हुई हैं और वह घर पर रहकर 12 से 15 हजार रुपये हर महीने की आय प्राप्त कर रही हैं। उन्होने बताया कि वर्ष 2017 में गुरुग्राम के रूरल डेवलपमेंट सेल्फ एंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण लिया था। उसके बाद बैंक से ऋण लेकर काम शुरू किया। अब आय का मुख्य साधन बन गया है। त्योहारों के दौरान गुरुग्राम के ही ऑर्डर पूरे करने में मशक्कत करनी पड़ती है। सरस मेलों से मिली पहचान परवेश ने बताया कि हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन ने मेरे जैसी औरतों को लखपति दीदी बनाया है। फरीदाबाद में दूसरी बार सरस मेले में स्टॉल लगाई हैं। वहीं पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में सरस योजना का लाभ मिला था और वहां पर भी स्टॉल लगाने का अवसर मिला था। इसके अलावा उत्तराखंड, कुरुक्षेत्र में आयोजित किए गए मेलों में भी स्टॉल लगाए थे। मेले में भी मिलते हैं ऑर्डर परवेश ने बताया कि मेलों के जरिये एक सरस आजीविका वालों की मार्केट तैयार होती है। यहां पर उत्पाद बिकने के साथ ऑर्डर भी प्राप्त होते हैं। अभी हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित होने वाले तीज महोत्सव का ऑर्डर मिला था। उसके लिए जूट की थैलियां बनानी थी। जूट के थैलों के अलावा बैग, पर्स भी बनाए जाते हैं। उनके स्टॉल 50 से लेकर 850 रुपये तक बैग उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि सभी लैपटॉप बैग बिक गए हैं।

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